नई दिल्ली:- प्रोपर्टी पर अधिकारों के प्रावधान की तरह ही प्रोपर्टी से कब्जा छुड़ाने के नियम व प्रावधान भी कानून में किए गए हैं। किसी प्रोपर्टी मालिक की प्रोपर्टी पर कब्जा होता है तो उसे कई खास तरह के अधिकार भी प्राप्त हैं, ताकि वह बिना किसी विवाद के अपनी प्रोपर्टी को कब्जाधारक से छुड़वा सके।
कुछ खास कदम उठाकर प्रोपर्टी मालिक आसानी से कब्जा छुड़वा सकता है। बहुत आसान तरीके से कब्जा छुड़वा सकते हैं। इतना ही नहीं आप कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने से भी बच जांएगे और प्रशासन खुद आपकी मदद करेगा। आइये जानते हैं कौन से कदम आपको उठाने होंगे।
ऐसे लें कानून की मदद –
अगर कोई आपकी प्रोपर्टी पर कब्जा कर लेता है तो पीड़ित कब्जाधारी के खिलाफ आपराधिक और सिविल दोनों ही तरह के मुकदमे दर्ज करा सकता है। प्रॉपर्टी पर अवैध कब्जे को हटवाने के लिए कानूनों की मदद कोई भी प्रोपर्टी मालिक ले सकता है, उसे प्रोपर्टी संबंधी जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। कब्जा छुड़ाने के लिए 4 कानूनी धाराओं का भी आपको पता होना जरूरी है। ये आपराधिक कानून और सिविल कानून के तहत आती हैं। इसके बाद आप कब्जाधारी के खिलाफ कोर्ट में जा सकते हैं।
धारा 420 में प्रावधान –
जब जमीनी मामले में किसी से धोखाधड़ी की गई हो या किसी को बल प्रयोग से उसकी संपत्ति से हटाया गया हो तो ये धारा 420 के तहस केस दर्ज करा सकते हैं। पहला कदम किसी प्रोपर्टी मालिक को कब्जा होने पर यही उठाना चाहिए।
क्या कहती है आईपीसी की धारा 406 –
धारा 406 का इस्तेमाल उस समय करें जब कोई व्यक्ति विश्वास पात्र बनकर प्रॉपर्टी को हथियाता है। यह संगीन अपराध माना जाता है, इसमें प्रोपर्टी मालिक आपराधिक मामला दर्ज करवा सकता है। इस धारा के तहत पीड़ित पुलिस थाने में कब्जाधारी की शिकायत कर सकता है।
धारा 467 में यह है प्रावधान –
फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार करके कोई प्रोपर्टी हथियाए जाए तो धारा 467 लागू होती है। इसमें साजिश के तहत फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर किसी की संपत्ति पर कब्जा करने का मामला दर्ज किया जाता है।
स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट के तहत लें मदद-
स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट सिविल कानून में गिना जाता है। जब कोई व्यक्ति किसी की संपत्ति पर जबरदस्ती रूप से कब्जा करता है तो इस कानून की मदद ली जा सकती है। स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट की धारा 6 के तहत पीड़ित को जल्दी न्याय मिल सकता है। इस कानून के अनुसार कब्जा करने के 6 महीने के भीतर मुकदमा दर्ज हो जाना चाहिए। हालांकि इस कानून के अनुसार सरकार के खिलाफ कोई मुकदमा या केस नहीं किया जा सकता।
