नई दिल्ली:– हरिद्वार में स्थित नीलेश्वर महादेव मंदिर प्राचीन सिद्ध पीठ है. हरिद्वार में नीलेश्वर मंदिर नीलगंगा के किनारे नील पर्वत पर हरिद्वार नजीबाबाद रोड पर स्थित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान भोलेनाथ ने समुद्र मंथन से निकाला विष अपने कंठ में धारण किया था. यहां भगवान भोलेनाथ का स्वयंभू शिवलिंग है. इस मंदिर की मान्यता है कि यहां जो भी श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक पूजा पाठ करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं भोलेनाथ पूरी कर देते हैं.
भगवान भोलेनाथ का कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर प्राचीन सिद्ध पीठ मे से एक है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में प्राचीन स्वयंभू शिवलिंग है. इस मंदिर की प्राचीन कथा भगवान भोलेनाथ के विवाह से जुड़ी हुई बताई जाती है. कहा जाता है कि जब भोलेनाथ की बारात कनखल में आई थी, तो उनकी बारात ने इस स्थान पर रुककर जलपान किया था. श्रावण माह में इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ की पूजा करने का विशेष महत्व है. यह मंदिर हरिद्वार में हरिद्वार-नजीबाबाद रोड पर सज्जनपुर पीली में एक पहाड़ी पर स्थित है.
श्रावण माह में भगवान भोलेनाथ के प्राचीन सिद्ध पीठ भीमेश्वर महादेव पर पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होने के साथ जीवन के सभी दुख दूर होने की धार्मिक मान्यता है. हरिद्वार में प्राचीन भीमेश्वर महादेव शिवलिंग हर की पौड़ी से महज 300 मीटर की दूरी पर भीमगोडा में स्थित है. कहा जाता है कि जब पांडव हिमालय जा रहे थे, तो उन्होंने इस स्थान पर रुककर महादेव की पूजा करने के लिए रेत से शिवलिंग की स्थापना की थी. श्रावण मास में यहां पूजा करने का विशेष महत्व है.
श्रावण मास में यहां पूजा करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है. हरिद्वार में स्थित प्राचीन विल्वकेश्वर महादेव मंदिर का जिक्र स्कंद पुराण में किया गया है. हरिद्वार में स्थित भोलेनाथ के प्राचीन सिद्ध पीठ में से यह महत्वपूर्ण स्थान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ को पति रूप में पाने के लिए यहां 3 हजार साल तक तपस्या की थी. यहां की मान्यता है कि जिन लड़कियों की शादी नहीं हो रही हो, उनके द्वारा पांच रविवार यहां पूजा करने से उनकी शादी हो जाती है.
भगवान भोलेनाथ का पशुपतिनाथ मंदिर प्राचीन हर की पौड़ी के पास श्रवण नाथ मठ में स्थित है. भगवान भोलेनाथ के इस स्थान पर श्रावण मास में पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. हरिद्वार में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर विश्व प्रसिद्ध नेपाल पशुपतिनाथ मंदिर जैसा बना हुआ हैं. श्रावण मास में यहां पूजा करने का बहुत बड़ा महत्व है, इसलिए श्रावण मास में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं टूटती है.
दक्षेश्वर महादेव मंदिर भगवान भोलेनाथ के ससुराल कनखल में स्थित प्राचीन स्थान है. इस स्थान का जिक्र स्कंद पुराण, शिव महापुराण आदि बहुत से धार्मिक ग्रंथो में विशेष रूप से किया गया है. धार्मिक कथाओं के अनुसार भगवान भोलेनाथ पूरा सावन का महीना यहीं वास करते हैं. इस दौरान यहां पूजा पाठ करने वाले श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पुरी करते हैं. सावन के महीने में भगवान भोलेनाथ इसी स्थान से पूरे ब्रह्मांड का संचालन करते हैं. इसलिए सावन के महीने में दक्षेश्वर महादेव मंदिर का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है.
नील गंगा किनारे नील पर्वत के पास गौरी शंकर महादेव मंदिर भोलेनाथ का प्राचीन सिद्ध पीठ है. श्रावण मास में यहां पूजा पाठ करने से मन को शांति मिलती है. भगवान भोलेनाथ उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. भगवान भोलेनाथ के इस प्राचीन सिद्ध पीठ पर भगवान भोलेनाथ की सतयुगी यज्ञ शाला है, जहां भोलेनाथ यज्ञ किया करते थे. वही पास में माता के यज्ञ का भी स्थान है, जो त्रेता युग का बताया जाता है. श्रावण मास में इस स्थान पर भोलेनाथ की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है. गौरी शंकर महादेव मंदिर हरिद्वार-नजीबाबाद रोड पर स्थित है.
श्रावण मास में भोलेनाथ के प्राचीन तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर में पूजा करने से दुख तिल तिल कर घट जाते हैं. साथ बही जीवन में सुखों की प्राप्ति होती है. यह मंदिर हरिद्वार की उपनगरी कनखल में गंगा किनारे स्थित है. भगवान भोलेनाथ के इस प्राचीन सिद्ध पीठ का वर्णन बहुत से धार्मिक ग्रंथो में किया गया है. धार्मिक कथाओं के अनुसार जब माता सती ने खुद के शरीर का त्याग किया था, तो महादेव विशाल महाकाल रूप में यहां आए थे. इसी स्थान पर भोलेनाथ ने अपने महाकाल रूप को सूक्ष्म रूप में किया था. भगवान भोलेनाथ का यह प्राचीन स्थान हिंदुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है.
