वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण छठी बार आम बजट पेश करने जा रही हैं. इस साल का बजट अंतरिम होगा. बजट से जुड़ी कुछ परंपराएं दशकों से चली आ रही हैं, जैसे बजट पेश करने के कुछ दिन पहले हलवा सेरेमनी. ऐसी भी कई परंपराएं हैं जो समय के साथ बदली हैं.आजाद भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश हुआ था. देश के पहले वित्त मंत्री आर के शनमुखम चेट्टी ने शाम 5 बजे इसे पेश किया था.बजट में आज भी सरकार की कमाई और खर्च का लेखा-जोखा होता है. हालांकि, समय के साथ बजट को पेश करने की परंपरा में बदलाव आया है.
आइए नजर डालते हैं ऐसी ही कुछ बदलावों पर.
1- शुरू हुआ इनकम टैक्सभारत में बजट की शुरूआत 164 साल पहले हुई थी. रिपोर्ट्स के अनुसार, हिंदुस्तान का पहला बजट जेम्स विल्सन ने 18 फरवरी,1860 को पेश किया था. जेम्स अविभाजित भारत में वायसराय लॉर्ड कैनिंग की काउंसिल में फाइनेंस मेंबर थे. उनका बजट कई मायनों में ऐतिहासिक था. 1858 में भारत का प्रशासन ईस्ट-इंडिया कंपनी से ब्रिटिश क्राउन के हाथों में आया था.ये भी पढ़ेंकौन देश कितना भ्रष्ट, कैसे तय होता है? जानिए भारत-पाकिस्तान का हालकौन देश कितना भ्रष्ट, कैसे तय होता है? जानिए भारत-पाकिस्तान का हालभारत का वो हिन्दू विरोधी बजट, जिसे जिन्ना के करीबी लियाकत ने पेश किया?भारत का वो हिन्दू विरोधी बजट, जिसे जिन्ना के करीबी लियाकत ने पेश किया?तोहफों के लालच ने कैसे इमरान-बुशरा बीबी को सलाखों के पीछे पहुंचाया?तोहफों के लालच ने कैसे इमरान-बुशरा बीबी को सलाखों के पीछे पहुंचाया?इसी बजट में इनकम टैक्स कानून की शुरूआत हुई थी. इसे ब्रिटिश राज की कमाई को बढ़ाने के लिए लाया गया था. हालांकि, विल्सन ने तर्क दिया कि ब्रिटिश सरकार भारतीयों को व्यापार करने का सुरक्षित माहौल देती है. इसलिए फीस के तौर पर उनसे इनकम टैक्स लेना वाजिब है
.2- हिंदी में भी आया बजट1947 से लेकर 1955 तक बजट केवल अंग्रेजी में ही पेश होता था. 1955-56 से, सरकार ने इसे हिंदी में भी प्रकाशित करना शुरू कर दिया. इस बदलाव का श्रेय सीडी देशमुख को जाता है, जो भारत के तीसरे वित्त मंत्री थे. बजट को हिंदी में प्रकाशित करने से इसकी पहुंच आम लोग तक पहुंची. तब से बजट भाषण हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में तैयार होते आ रहा है
.3- शाम की जगह सुबह पेश होने लगा बजटसाल 1999 तक, बजट शाम को पेश होता था. ये परंपरा ब्रिटिश राज से चली आ रही थी. ऐसा ब्रिटेन के टाइम जोन के अनुसार किया गया था, जहां बजट सुबह 11 बजे पेश होता था. उस हिसाब से भारत में शाम 5 बजे बजट पेश होता था. लेकिन 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने इसे बदल दिया. तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस परंपरा को तोड़ते हुए सुबह 11 बजे देश के सामने बजट रखा
.4- फरवरी की पहली तारीख बजट के लिएवर्तमान में बजट 1 फरवरी को संसद में पेश होता है. हालांकि, कुछ सालों पहले तक ऐसा नहीं था. बजट को पहले भी फरवरी महीने में पेश किया जाता था, लेकिन महीने की अंतिम तारीख यानी 28 या 29 को. 2017 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पहली बार 1 फरवरी को बजट पेश किया. तब से बजट की तारीख ये ही चली आ रही है
.5- खत्म हुई रेल बजट पेश होने की 92 साल पुरानी परंपरा2017 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट में एक और परंपरा बदली थी. रेल और आम बजट को एक साथ पेश किया जाने लगा.इससे पहले तक रेलवे बजट को अलग से पेश किया जाता था. इसकी शुरूआत 1924 में ब्रिटिश हुकूमत ने की थी. उस समय सरकार के राजस्व का एक बड़ा हिस्सा रेलवे से आता था. रिपोर्ट्स के अनुसार, रेलवे का बजट कुल केंद्रीय बजट के 80 फीसदी से ज्यादा होता था.बाद में रेलवे बजट का हिस्सा कम होता गया. 1 फरवरी, 2017 को अरुण जेटली ने आजाद भारत का पहला संयुक्त बजट पेश किया. इसके साथ ही 92 सालों से चली आ रही परंपरा खत्म हो गई.
6- चमड़े ब्रीफकेस से बही-खातापिछले साल की तरह, उम्मीद की जा रही है कि इस साल भी निर्मला सीतारमण लाल रंग का बही-खाता लेकर संसद आएगी. बही-खाते की परंपरा बीते कुछ सालों से ही शुरू हुई है. इससे पहले तक चमड़े के ब्रीफकेस में बजट के पेपर्स लाने की परंपरा थी. दरअसल, बजट शब्द फ्रांस के बुजे (Bougette) से बना है. बुजे का मतलब चमड़े का बैग होता है.हिंदुस्तान के पहले बजट से ही चमड़े के बैग में बजट के कागजों को लाने की परंपरा रही है. 1947 के पहले बजट के लिए लाल रंग के लेदर ब्रीफकेस का इस्तेमाल हुआ. बाद में कुछ मंत्रियों ने काले रंग के ब्रीफकेस तो किसी ने दूसरे डिजाइन के बैग में बजट के कागज रखें. हालांकि, बैग और ब्रीफकेस के तौर पर हमेशा लेदर का ही इस्तेमाल किया गया. साल 2019 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस परंपरा को बदला.
.7- … और अब पेपरलेस बजटनिर्मला सीतारमण ने 2021 का बजट पेश करते वक्त एक और परंपरा शुरू की थी. कोरोनाकाल के इस बजट में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतरमण ने लीक से हटकर देश का पहला ‘पेपरलेस बजट’ पेश किया. सैकड़ों कागजों की जगह एक टैबलेट ने ले ली. तब से सीतारमण टैबलेट से ही बजट पढ़ती हैं.
