मध्यप्रदेश:– तुलसी का पौधा भारतीय संस्कृति और आस्था में विशेष स्थान रखता है. आमतौर पर इसे पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों से जोड़ा जाता है, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से भी तुलसी का महत्व अत्यधिक है. माना जाता है कि तुलसी के पौधे में ऐसी दिव्य ऊर्जा निहित होती है, जो ग्रहों के दुष्प्रभाव को कम करने में सक्षम है. विशेषकर शनि और शुक्र से जुड़ी पीड़ा को दूर करने के लिए तुलसी के उपाय बेहद प्रभावी माने गए हैं.
पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख है कि तुलसी को भगवान विष्णु की प्रिय माना गया है. यही कारण है कि जब व्यक्ति नियमित रूप से तुलसी को जल अर्पित कर उसकी परिक्रमा करता है, तो शुभ फल प्राप्त होते हैं. ज्योतिष के अनुसार, यदि किसी जातक की कुंडली में शनि की दशा-परदशा कष्टप्रद हो रही हो या शुक्र अशुभ फल दे रहा हो, तो तुलसी के पौधे की सेवा करने से नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं. माना जाता है कि तुलसी के पत्तों का सेवन और सुबह-शाम तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाने से मानसिक शांति के साथ ही जीवन में स्थिरता आती है.
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि तुलसी की जड़ को गले में धारण करना शनि के प्रतिकूल परिणामों को संतुलित करता है. वहीं, शुक्र की पीड़ा से मुक्ति के लिए तुलसी के पौधे में हर शुक्रवार को कच्चा दूध चढ़ाना और गुलाबी फूल अर्पित करना लाभकारी सिद्ध होता है. तुलसी को घर के आंगन या बालकनी में लगाने से न केवल वातावरण शुद्ध होता है, बल्कि परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है.
