नई दिल्ली: – आम आदमी पार्टी का किले में सेंध लगाने के लिए बीजेपी ने इस बार चुनाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि उसने लगभग दो साल पहले ही चुनाव के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी थी। पार्टी ने अलग-अलग स्तरों पर कई टीमें भी बनाईं, जिन्होंने पार्टी की रणनीति पर अमल शुरू किया। इस टीम में कुछ प्रमुख चेहरे ये हैं:
दिल्ली नगर निगम चुनाव में पार्टी की हार के बाद पहले कार्यकारी और फिर पूरी तरह से प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सचदेवा को दी गई। सचदेवा ने AAP सरकार को घेरने की तैयारी तो की ही, साथ ही पार्टी में चल रही गुटबाजी को कंट्रोल करने में भी अहम भूमिका निभाई। जिसका नतीजा ये रहा कि पार्टी एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरी। इससे पहले उनकी अगुवाई में ही झुग्गी झोपड़ियों में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए अभियान शुरू किया गया, जिसमें पार्टी के बाकी नेताओं को भी शामिल किया गया।
ओडिशा से सांसद रहे बैजयंत पांडा के लंबे राजनीतिक अनुभव का भी पार्टी को फायदा मिला। पार्टी में उम्मीदवारों की पहचान करने से लेकर मुद्दों को शॉर्टलिस्ट करने की जिम्मेदारी निभाई। पार्टी आलाकमान और प्रदेश इकाई के बीच तालमेल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उन्होंने ही प्रदेश की अलग-अलग यूनिटों के कामकाज की निगरानी भी की। ये प्रयास पार्टी को जमीन स्तर पर मजूबत करते चले गए।
बीजेपी के राषट्रीय संगठन मंत्री बी.एल. संतोष भी दिल्ली फतह करने के अभियान में पीछे नहीं रहे। वह भी दिल्ली बीजेपी को मजबूत करने वालों में प्रमुख चेहरा थे। उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों पर दिल्ली में बाकायदा निगरानी सिस्टम को दुरुस्त किया। साथ ही ये भी सुनिश्चित किया कि दिल्ली में आरएसएस की टीमें भी पूरी ताकत से काम करें। ताकि दिल्ली में छिटक गए बीजेपी के पुराने वोटरों को भी साथ लाया जाए।
अनुभवी बिधूड़ी ने दिल्ली में मैनिफेस्टो तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। इससे पहले बीजेपी ने मुफ्त योजनाओं पर उस तरह से आक्रमक प्रचार नहीं किया, जैसा इस बार किया गया। उन्होंने ही मैनिफेस्टो बनाने के लिए कमिटी के अन्य सदस्यों के साथ ऐसी योजनाओं को शामिल किया, जिनकी वजह से आप को टक्कर दी जा सके। इनमें महिला सम्मान योजना के तहत ढाई हजार रुपये देना भी शामिल है। साथ ही मेनिफेस्टो के जरिए ही लोगों को भरोसा दिलाया कि केजरीवाल सरकार की शुरू की गई मुफ्त की योजनाएं आगे भी जारी रहेंगी।
दिल्ली बीजेपी के संगठन मंत्री पवन राणा को भी लगभग दो साल पहले ही दिल्ली संगठन की जिम्मेदारी मिली थी। राणा ने दिल्ली को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर नेताओं को जिम्मेदारी दी और यह सुनिश्चित किया कि अगर कहीं कार्यकर्ताओं की नाराजगी है तो उसे दूर किया जाए। एकजुट किया जाए, ताकि उनके अंदर उत्साह की कमी न हो और पार्टी को बूथ लेवल पर किसी तरह का नुकसान न पहुंचे। कार्यकर्ताओं को उन्होंने जीत की नींव बनाया।
