यूपी:- इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर ने अपने रिटायरमेंट भाषण में कॉलेजियम पर बेहद ही संगीन आरोप लगाया है.
उन्होंने आरोप लगाया है कि 2018 में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से उनका ट्रांसफर किया गया था जोकि उन्हे परेशान करने के लिए था. उस वक्त भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा कॉलेजियम के प्रमुख थे. न्यायमूर्ति दिवाकर मंगलवार को सेवानिवृत हो गए.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, अपने भाषण में न्यायमूर्ति ने कहा कि उनको लगता है कि उनका ट्रांसफर का आदेश गलत इरादे से जारी किया गया. ऐसे मौके पर किसी न्यायाधीश की तरफ से ऐसी टिप्पणी करना असामान्य है.
पूर्व सीजेआई ने 2018 में छत्तीसगढ़ से इलाहाबाद किया ट्रांसफर
न्यायमूर्ति दिवाकर ने कहा, ”31 मार्च, 2009 को मुझे बेंच में पदोन्नत किया गया. मैंने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में एक न्यायाधीश के तौर पर अक्टूबर, 2018 तक अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया. मेरे कार्यों से सभी संतुष्ट थे. अचानक भारत के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने मुझ पर अधिक ही प्यार दिखाया, जिसकी वजह मुझे अब भी नहीं पता. उन्होंने मेरा स्थानांतरण इलाहाबाद हाई कोर्ट में कर दिया, जहां मैंने 3 अक्टूबर, 2018 को कार्यभार ग्रहण किया था.’₹
स्थानांतरण आदेश परेशान करने के इरादे से हुआ जारी
उन्होंने अपने करियर की पीड़ा जाहिर करते हुए यह भी कहा, ”मेरा स्थानांतरण आदेश मुझे परेशान करने के इरादे से जारी हुआ प्रतीत हुआ, हालांकि यह मेरे लिए वरदान साबित हुआ. यहां मुझे मेरे साथी न्यायाधीशों और बार के सदस्यों की तरफ से जबरदस्त सहयोग और समर्थन मिला.
इस साल फरवरी में इलाहाबाद HC के एक्टिंग चीफ जस्टिस बने
इस साल की शुरुआत में, न्यायमूर्ति दिवाकर के नाम की सिफारिश प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचू़ड़ की अगुवाई वाले कॉलेजियम की तरफ से इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद के लिए की गई और न्यायमूर्ति दिवाकर को 13 फरवरी, 2023 को इलाहाबाद हाई कोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया.
26 मार्च, 2023 को उन्होंने मुख्य न्यायाधीश की शपथ ली थी. उन्होंने यह भी कहा,मैं मौजूदा प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ का बहुत आभारी हूं, जिन्होंने मेरे साथ हुए अन्याय को सुधारा.
मार्च 2009 में नियुक्त हुए थे छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जज
न्यायमूर्ति दिवाकर के करियर की बात करें तो मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 1984 में बतौर अधिवक्ता उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी. वर्ष 1961 में जन्मे न्यायमूर्ति दिवाकर ने जबलपुर में दुर्गावती यूनिवर्सिटी से लॉ में ग्रेजुएशन किया और जनवरी, 2005 में सीनियर एडवोकेट बने.
