नई दिल्ली:– किसी रिश्ते को निभाना आसान नहीं होता. कई बार हम सोचते हैं कि हमारे लिए कोई एकदम परफेक्ट इंसान होना चाहिए, जो हमारी सोच, पसंद और हर बात में हम जैसा हो. लेकिन क्या सच में ऐसा संभव है? आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु इस बारे में बेहद सरल लेकिन गहरी बात करते हैं. वह कहते हैं कि इस ब्रह्मांड में हर तरह के इंसान हैं और सबमें कोई न कोई कमी जरूर होती है. तो फिर कैसे समझें कि कौन हमारे लिए सही है?
कोई भी परफेक्ट नहीं होता – खुद को भी समझें
सद्गुरु कहते हैं –
“इस ब्रह्मांड में हर तरह के बेवकूफ बनाए गए हैं. अगर आप समझते हैं कि आप भी एक तरह के बेवकूफ हैं, और दूसरा किसी और तरह का बेवकूफ है, तो आप उसे समझ पाएंगे.”
इसका मतलब है कि जब आप अपनी कमियों को पहचानते हैं, तभी आप दूसरों की कमियों को भी समझने और स्वीकार करने की क्षमता रखते हैं. रिश्ते का आधार यही है – स्वीकार करना, न कि परफेक्शन की तलाश.
‘हम एक-दूजे के लिए बने हैं’ – इस भ्रम से बचें
“अगर आपको लगता है कि आप एकदम परफेक्ट हैं और भगवान ने आपके लिए भी कोई परफेक्ट इंसान बनाया है, तो आप किसी दुर्घटना की ओर बढ़ रहे हैं.”
-सद्गुरु
यानी अगर आप रिश्ते को किसी परी-कथा की तरह देखने लगते हैं, जहां सब कुछ परफेक्ट होगा, तो जब असल जिंदगी सामने आती है, तो सब कुछ टूट सकता है.
एक जैसे नहीं, अलग होने से होता है प्यार
“अंतर होने के कारण ही आप प्रेम करते हैं, एक जैसे होने के कारण नहीं.”
–सद्गुरु
इसका अर्थ है कि किसी रिश्ते में दोनों लोगों का अलग-अलग होना जरूरी है. क्योंकि वही फर्क रिश्ते को रोचक बनाता है और एक-दूसरे से सीखने का मौका देता है.
समझ और स्वीकार – रिश्ते की असली कुंजी
रिश्ते में यह समझ जरूरी है कि सामने वाला भी इंसान है, उसमें भी कमियां होंगी. जब आप यह मान लेते हैं कि सामने वाला आपकी सोच से अलग है, और आप उसे वैसे ही स्वीकारते हैं, तभी रिश्ता गहराता है.
खुद को जानना सबसे जरूरी
सद्गुरु कहते हैं कि जब तक आप खुद को नहीं जानते, आप किसी और को सही से समझ ही नहीं सकते.
“अगर आप अपनी बातें और सीमाओं को नहीं जानते, तो आप दूसरों की सीमाओं को भी नहीं समझ पाएंगे.”
रिश्ते परफेक्ट नहीं होते, उन्हें परिपक्व बनाया जाता है. सद्गुरु के अनुसार, अगर आप यह समझ लें कि हर इंसान अलग है और खुद को जानकर दूसरों को समझना सीखें, तभी रिश्ते सच्चे बनते हैं. परफेक्ट पार्टनर नहीं, बल्कि समझदार साथी बनें और चुनें.
