बुधनी: मध्य प्रदेश की बुधनी सीट से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भाजपा ने चुनाव मैदान में उतार है तो कांग्रेस ने धारावाहिक रामायण- दो में हनुमानजी जी की भूमिका निभाने वाले विक्रम मस्ताल को। कहने को यह बहुचर्चित सीट पर है, मगर मुकाबला ठंडा है। बुधनी के मतदाता ‘शिव’ भक्त ही बने रहना चाहते हैं। वे शिवराज सिंह चौहान को पांचवीं बार मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं।
खुद यहां के मतदाता दावा करते हैं कि मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ जिस छिंदवाड़ा के विकास मॉडल की बात करते हैं, बुधनी के सामने वह फीका है। यहां छह सीएम राइज स्कूल हैं और मेडिकल कॉलेज बन रहा है। सड़कें शानदार हैं। रेलवे लाइन भी आ रही है। नर्मदा पर पहले एक पुल था, अब छह हैं। स्थानीय लोग विकास कार्यों की सूची इस फर्राटे से गिनाते हैं, जैसे स्वयं ही चुनाव लड़ रहे हों।
शिवराज नामांकन पत्र जमा करने के बाद क्षेत्र में नहीं आए। उनकी पत्नी साधना सिंह और बेटे कार्तिकेय प्रचार कर रहे हैं, लेकिन बुधनी के घर-घर में एक बोर्ड लगा है, जिसमें लिखा है- हम हैं शिवराज भैया का परिवार। यह संकेत दे रहा है कि शिवराज सिंह का चुनाव जनता खुद ही लड़ रही है। यही वजह है कि क्षेत्र के लोग बड़े गर्व से बताते हैं कि चुनाव प्रचार के लिए चंदा भी हम लोग ही देते हैं।
कैसा है बुधनी विधानसभा क्षेत्र
एक तरफ नर्मदा की लहरें, दूसरी तरफ विंध्याचल पर्वत श्रृंखला, लगभग 110 किलोमीटर तक सड़क किनारे बसा बुधनी विधानसभा क्षेत्र है। इसमें चार नगर परिषद बुधनी, शाहगंज, भेरूंदा और रेहटी शामिल हैं। नर्मदापुरम जाने वाले मार्ग के बाएं तरफ बुधनी और शाहगंज है तो दाईं ओर भेरूंदा और रेहटी है। यहीं है मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का पैतृक गांव जैत। खेती, परंपरागत व्यवसाय और बाजारों के अलावा केंद्रीय शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान और कई औद्योगिक इकाइयों के अलावा मेडिकल कॉलेज और छह सीएम राइज स्कूल।
लगभग तीन दशक से चौहान का क्षेत्र से जुड़ाव मतदाताओं के लिए भी सुकून भरा है। बुधनी आए तो अधिकांश समय गांव और खेतों में गुजर गया। इन दिनों बुधनी क्षेत्र में बासमती धान की फसल काटने का काम चल रहा है। जैत से गोपालपुर तक लगभग 110 किमी के सफर में कई बाजार और प्रमुख चौराहों से लेकर व्यावसायिक केंद्रों तक जब हम लोगों से मिले क्षेत्र का लगभग हर दूसरा मतदाता खुद को शिवराज से जुड़ा बताने में संकोच नहीं करता था।
