मध्यप्रदेश। केके मिश्रा कहते हैं कि ऐसे ही इस जगह को कमलनाथ का मज़बूत गढ़ नहीं कहा जाता है.
उनका कहना था, मज़बूत गढ़ कमलनाथ जी ने छिंदवाड़ा को अगर बनाया है तो उसके पीछे उनकी तपस्या और ईमानदार वचनबद्धता है. विकास कार्यों और औद्योगीकरण का श्रेय उन्हीं को जाता है. लेकिन सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात ये है कि छिंदवाड़ा की जनता से उनका सीधा संबंध है. कमलनाथ हर किसी की ख़ुशियों और दुख दर्द में शामिल होते हैं.
यहीं शहर में, हमारी मुलाक़ात मानिक लाल चंद्रवंशी से हुई जो छोटा मोटा व्यापार करते हैं.
उन्होंने अपने परिवार का उदाहरण दिया और बताया कि उनके छोटे भाई पंकज बीजेपी के कार्यकर्ता हैं.
वो बताते हैं, मेरा भाई बीजेपी का कार्यकर्ता है. लेकिन जब वर्ष 2012 में उसका पैर टूट गया था तो उसके इलाज के लिए कमलनाथ जी ने 35 से 40 हज़ार रुपयों का आबंटन कराया था.
सवाल उठता है कि क्यों कमलनाथ और उनके परिवार के लोगों पर ही छिंदवाड़ा के लोग भरोसा करते रहे हैं?
मध्य प्रदेश की राजनीति पर चार दशकों से नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह मानते हैं कि ऐसा इसलिए है क्योंकि चुनाव जीतने के बाद भी कमलनाथ लोगों से जुड़े ही रहते हैं.
उनका कहना था, कमलनाथ देश के उन कम नेताओं या राजनेताओं में से हैं जो अपने चुनावी क्षेत्र की वैसे ही देखभाल करते हैं जैसे एक ‘नर्स’ करती है. पूरे-पूरे साल वो लोगों के काम में लगे रहते हैं, उनसे मिलते रहते हैं और उनकी समस्याओं को निपटाते रहते हैं. मैं 40 साल से मध्य प्रदेश कवर कर रहा हूँ. मैंने पाया है कि देश में कोई भी नई योजना आ जाए. भारत सरकार की योजना हो या मध्य प्रदेश सरकार की. सबसे पहले वो योजना छिंदवाड़ा में लागू होती रही है.
इस बारे में कमलनाथ बताते हैं कि वो लोगों के बीच इस बात को लेकर कोई भेदभाव नहीं करते कि उनके पास आने वाला किस राजनीतिक दल का समर्थक है.
वो बताते हैं, “मुझसे मिलने कोई भी आता है. कोई तकलीफ़ में होता है तो मैं उसकी मदद करने का प्रयास करता हूँ और ये मैं कभी नहीं देखता वो किस पार्टी का है, मैं कहता हूँ कि जिसको तकलीफ़ है, तो तकलीफ़ है।
