नई दिल्ली :– अहोई अष्टमी का व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह व्रत मुख्य रूप से संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। इस व्रत को संतान प्राप्ति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है और राधा कुंड में स्नान करने की परंपरा से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। ऐसे में आइए जानते हैं राधा कुंड में स्नान करने की परंपरा से जुड़ी एक पौराणिक कथा-
जानकारों के अनुसार, राधा कुंड जो कि मथुरा जिले में गोवर्धन पर्वत के पास स्थित है, कृष्ण और राधा की लीलाओं से जुड़ा हुआ है। यह स्थान धार्मिक दृष्टि से बहुत ही पवित्र माना जाता है, और मान्यता है कि यहां स्नान करने से भक्तों के सभी पाप धुल जाते हैं और उन्हें विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। कहा जाता है कि नि:संतान दंपति अहोई अष्टमी के दिन राधा कुंड में स्नान करके विशेष आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है।
पौराणिक कथा के अनुसार, मथुरा के राजा कंस ने भगवान कृष्ण को मारने के लिए अरिष्टासुर राक्षस को यहां भेजा था। राक्षस ने गाय रूपी भेष धारण किया और ग्वाल वालों के यहां गाय को मारने लगा।
कृष्ण त्रिलोकी थे। उन्होंने अरिष्टासुर राक्षस को पहचान लिया और उसका वध कर दिया। राधा ने देखा कि कृष्ण ने गौ हत्या कर दी है। इससे उन पर गौ हत्या का पाप लगा गया। राधा ने कृष्ण से कहा इस पाप से मुक्ति पाने के लिए आपको सभी नदियों में जाकर स्नान करना पड़ेगा, तभी आपको इस पाप से मुक्ति मिलेगी।
पाप से मुक्ति के लिए अहोई अष्ठमी की आधी रात को भगवान कृष्ण और राधा द्वारा अलग-अलग दो कुंडों का निर्माण हुआ, जिसे आज राधाकुंड, श्यामकुंड के नाम से जानते हैं। इस दिन राधा ने आशीर्वाद दिया था कि कोई भी दंपति अहोई अष्टमी के दिन मध्यरात्रि में एक साथ स्नान करेंगे तो उनको संतान प्राप्ति होगी। ऐसी मान्यता है कि इस कुंड में सभी तीर्थों का वास है।
संतान प्राप्ति एवं लंबी उम्र के लिए व्रती महिलाएं इस दिन सुबह जल्दी उठकर राधा कुंड पर जाती हैं। स्नान के दौरान भगवान कृष्ण और माता राधा का स्मरण करती है।
इसके बाद महिलाएं विशेष पूजा करती हैं और अहोई माता से संतान की लंबी उम्र, समृद्धि, और सुख-शांति की प्रार्थना करती हैं।
अहोई अष्टमी पर राधा कुंड में स्नान को बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। जिन दंपत्तियों को संतान नहीं होती, वे इस दिन राधा कुंड पर स्नान कर अहोई माता से संतान सुख की प्रार्थना करते हैं, और उन्हें संतान सुख प्राप्त होने की मान्यता है।
