गौरेला पेंड्रा मरवाही, 18 फरवरी। जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही की विधिक सलाहकार महिला उत्पीड़न सदस्य मानव अधिकार संगठन अध्यक्ष शोभा पाठक ने विधिक जागरूकता के अंतर्गत अपने व्याख्यान में मानवीय व्यवहारों पर प्रकाश डालते हुए इंगित किया कि तितिक्षा (सहनशीलता) जीव के लिए सर्वोच्च गहना है जिसका लेखांकन श्रुतियो स्मृतियों में भी वर्णित है सहनशीलता एक ऐसा निर्विवाद सत्य है जिसको धारण करने पर कोई विवाद ही नहीं!
“खुशियों के लिए क्यों किसी का इंतजार: आप ही तो हो अपने जीवन के शिल्पकार,
चलो आज मुश्किलों को हराते है: और दूसरों की खुशी के लिए खुद पर चिंतन करते हैं”
जीवन में सम्मान इच्छा और भिक्षा से नहीं अपितु तितिक्षा (सहनशीलता) से जरूर प्राप्त होता है। जीवन को सम्मानीय बनाने की चाहना की अपेक्षा उसे सहनशील बनाने का प्रयास अधिक श्रेयस्कर है।
श्रीमदभागवत की कहानी भी कहती हैं कि महान वो नहीं जिसके जीवन में सम्मान हो अपितु महान् वो है जिसके जीवन में सहनशीलता हो क्योंकि सहनशीलता अथवा तितिक्षा ही तो साधुता का और श्रेष्ठता का परिचायक व आभूषण है।
सम्मान मिलना बुरी बात भी नहीं मगर मन में सम्मान की चाह रखना अवश्य श्रेष्ठ पुरुषों के स्वभाव के विपरीत है जो विचलित करतें रहता है। किसी के जीवन की श्रेष्ठता का मूल्यांकन इस बात से नहीं होता कि उसे कितना सम्मान मिल रहा है अपितु इस बात से होता है कि वह व्यक्ति कितने सम्मान से जी रहा है।
“नजदीक के दुश्मन से भी ज्यादा खतरनाक होता है” भटकता मन
!!!…कर्म बहुत ध्यान से कीजिये, क्योंकि न किसी की दुआ खाली जाती है, और न ही किसी की बद्दुआ…!!!