नई दिल्ली:- वक्फ संशोधन बिल 2025 गुरुवार को लोकसभा में 11 घंटे तक चली बहस के बाद पारित हो गया. भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगियों द्वारा जोरदार समर्थन प्राप्त इस विधेयक के पक्ष में 288 वोट पड़े, जबकि इसके खिलाफ 232 वोट पड़े. सदन में इसकी शुरुआत हंगामेदार रही, क्योंकि विपक्षी इंडिया ब्लॉक पार्टी के नेताओं और सदस्यों ने इसका जमकर विरोध किया.
विपक्ष द्वारा किए गए संशोधनों को खारिज किए जाने और बिल के स्पष्ट रूप से पारित होने के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी संसद से चले गए. वक्फ संशोधन विधेयक 2025 आज राज्यसभा में पेश किया गया है. इस विवादास्पद विधेयक का मुसलमानों ने भी कड़ा विरोध किया, जहां कई लोगों ने प्रस्तावित संशोधनों पर गुस्सा और निराशा व्यक्त की, वहीं अन्य ने मुसलमानों के भविष्य को लेकर चिंता जताई.
इस संदर्भ में एमडीएमके सांसद दुरई वाइको ने कहा कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय के हितों को कमजोर करता है और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है. उन्होंने कहा, “वे इसे जीत सकते हैं, लेकिन यह मुस्लिम समुदाय के साथ बहुत बड़ा अन्याय है और हम अंत तक उनके लिए लड़ेंगे.” ऐसे में यह समझना जरूरी है कि बिल में प्रस्तावित परिवर्तन क्या हैं और मुस्लिम समुदाय इसका विरोध क्यों कर रहा है.
वक्फ संपत्ति से जुड़े मुद्दे
वक्फ बिल के तहत नए कानून के लागू होने के बाद अगर वक्फ बोर्ड द्वारा दावा की गई संपत्ति आधिकारिक रूप से रजिस्टर नहीं है, तो वह छह महीने के बाद बोर्ड कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटा सकता. रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 500 से 600 साल पुराने कई वक्फ ऐसे हैं, जिनके पास उचित दस्तावेज नहीं हैं. इसलिए वक्फ को डर है कि उसकी अनरजिस्ट्रड मस्जिदें, स्कूल और यहां तक कि कब्रिस्तान कानूनी विवादों में फंस जाएंगे.
लिमिटेशन एक्ट 1963
संशोधन विधेयक धारा 107 को हटाने की अनुमति देता है और वक्फ बोर्ड को लिमिटेशन एक्ट 1963 के दायरे में लाता है. यह अधिनियम अब वक्फ संपत्ति के दावों पर लागू होगा और लंबी मुकदमेबाजी को कम करेगा.
मनमाने संपत्ति के दावों का अंत
इसके अलावा संशोधन के तहत वक्फ बिल की धारा 40 को हटाने के साथ, वक्फ बोर्डों को संपत्तियों को वक्फ के रूप में घोषित करने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा. साथ ही समावेशिता के लिए अब दो गैर-मुस्लिमों को केंद्रीय और राज्य वक्फ बोर्डों में शामिल किया जाएगा. केवल प्रैक्टिसिंग मुस्लिम (पांच साल तक) ही अपनी संपत्ति वक्फ को समर्पित कर सकते हैं.
ट्रस्टों को अलग करना
नए कानून के तहत मुस्लिमों द्वारा किसी भी कानून के तहत बनाए गए ट्रस्टों को अब वक्फ नहीं माना जाएगा. सरकार का ट्रस्टों पर पूरा नियंत्रण होगा.
वार्षिक ऑडिट में सुधार
एक लाख रुपये से अधिक आय वाले वक्फ संस्थानों को अनिवार्य रूप से राज्य द्वारा नियुक्त ऑडिटरों द्वारा ऑडिट करवाना होगा. इसके अतिरिक्त बोर्ड में वक्फ संस्थानों का अनिवार्य योगदान 7 प्रतिशत से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है.