जूनागढ़ :- सोमनाथ मंदिर के शिवलिंग पर आर्ट ऑफ लिविंग के पंडित रविशंकर के बयान पर मंदिर ट्रस्ट ने प्रतिक्रिया दी है. ट्रस्ट ने श्रीश्री रविशंकर के बयान को उनका निजी विचार बताया है. श्रीश्री रविशंकर ने कहा था कि सोमनाथ मंदिर के मूल शिवलिंग के अवशेष मिले हैं, और यह करीब एक हजार साल पुराना है.
उनका दावा है कि यह मूल शिवलिंग का टुकड़ा है. इस मंदिर को महमूद गजनवी ने नुकसान पहुंचाया था. सोमनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. मंदिर ट्रस्ट ने कहा कि बिना किसी साक्ष्य और प्रमाण के वह इस तरह के दावे को सही नहीं मान सकता है. उन्होंने कहा कि यदि कोई भी प्रमाण सामने लाए जाते हैं, तो वह इस पर विचार करेगा.
सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी और पूर्व सचिव प्रवीण लहरी ने पंडित रविशंकर के दावे को लेकर फोन पर एक्सक्लूसिव बातचीत की.
उन्होंने कहा, सोमनाथ मंदिर के शिवलिंग के चुंबकीय पत्थर, जिन्हें श्रीश्री रविशंकर शिवलिंग के टुकड़े बता रहे हैं, उनका निजी बयान है. साथ ही अगर उनके पास इस चुंबकीय पत्थर के सबूत को लेकर किसी तरह का सबूत या प्रमाण है तो सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट पूरे मामले में आगे बढ़ सकता है.
999 साल पहले की घटना: आपको बता दें कि पंडित रविशंकर अपने सोशल मीडिया वीडियो में बता रहे हैं कि, ‘आज से 999 साल पहले जब विधर्मियों ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया और मंदिर के साथ शिवलिंग को भी क्षतिग्रस्त कर दिया. तब शिवलिंग के कुछ टुकड़े सदियों तक कुछ लोगों के पास सुरक्षित रहे, ये टुकड़े उन्हें (पंडित रविशंकर) दे दिए गए. सोमनाथ मंदिर का शिवलिंग, जिसे चुंबकीय ऊर्जा के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता था, ऐसी चुंबकीय ऊर्जा वाले पत्थर लगातार हवा में तैरते रहते हैं.”
लहरी ने पूछा है कि यह पत्थर कितना पुराना है? उनके पास जो पत्थर है, वह उन्हें किसने दिया? कहां से मिला? कब मिला? इस तरह के सहायक साक्ष्य मांगे गए हैं. इस प्रकार, यदि पंडित रविशंकर ऐसे साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं, जिन्हें भारत के धर्मशास्त्र और वास्तुकला द्वारा स्वीकार किया जा सके, तो सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट इस मामले में आगे बढ़ सकता है.
श्रीश्री रविशंकर ने दावा किया कि महमूद गजनवी ने अपने अंतिम और 18वें आक्रमण में सोमनाथ मंदिर के शिवलिंग को तोड़ा था. उसी समय कुछ ब्राह्मणों ने उस टुकड़े को अपने पास रख लिया था. ये अग्निहोत्री ब्राह्णण थे. ये उस पत्थर को लेकर दक्षिण भारत आ गए थे. उन्होंने तमिलनाडु में इसे सुरक्षित रूप से रख दिया. तब से इसकी पूजा की जा रही है.
श्रीश्री ने आगे कहा कि 1924 में यह शिवलिंग शंकराचार्य स्वामी चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती को सौंपा गया. उनके यहां से यह पत्थर पंडित सीताराम शास्त्री नाम के एक ब्राह्मण को दे दिया गया. शास्त्री अग्निहोत्री ब्राह्णण हैं. रविशंकर ने यह भी दावा किया है कि उनको यह टुकड़ा सीताराम शास्त्री से मिला है.
रविशंकर ने कहा कि इस टुकड़े से बने शिवलिंग को सोमनाथ मंदिर में फिर से स्थापित करने की जरूरत है. उनके अनुसार इसकी स्थापना से पहले इस पवित्र शिवलिंग को अयोध्या मंदिर समेत प्रमुख मंदिरों में ले जाना चाहिए.