श्रीनगर:- ऑपरेशन सिंधुर के दौरान सीमा सुरक्षा बल की महिला कर्मियों ने असाधारण साहस और बहादुरी का परिचय दिया.साथ ही पाकिस्तानी हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया और कई पाकिस्तानी चौकियों को नष्ट कर दिया. उन्हें पुरुष कर्मियों की तरह ही ट्रेनिंग दी गई है.
बीएसएफ की महिला कर्मियों ने बहादुरी और दृढ़ संकल्प का उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए ‘ऑपरेशन सिंधुर’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. महिला कर्मियों ने ईटीवी भारत से खास बातचीत में कहा कि उन्हें पुरुष कर्मियों के बराबर ट्रेनिंग मिली है और ऑपरेशन सिंधुर के दौरान उन्होंने उसी भावना के साथ सीमाओं की रक्षा की.
महिला बीएसएफ अधिकारियों ने कहा, “हमने ऑपरेशन सिंधुर के दौरान पाकिस्तानी चौकियों को निशाना बनाया और अपनी स्थिति से एक इंच भी पीछे नहीं हटे. हम सीमा पर स्थित चौकियों और फॉरवर्ड पोस्ट पर डटे रहे.
साहस और दृढ़ संकल्प
बीएसएफ की महिला कर्मियों ने न केवल साहस के साथ दुश्मन का सामना किया, बल्कि देश को आश्वस्त भी किया क्योंकि वे सीमाओं पर राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह वाकिफ हैं. कठुआ, सांबा और जम्मू सेक्टर में सीमा चौकियों पर दुश्मनों से लोहा लेने वाली बीएसएफ की ये जवान महिलाएं देश की सीमाओं की रक्षा ही नहीं कर रही हैं, बल्कि साहस और दृढ़ संकल्प की भी जीती जागती मिसाल हैं.
दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाया
खास बातचीत में बीएसएफ की इन महिलाओं ने युद्ध के मैदान से जुड़े अपने अनुभव साझा किए. एक कर्मी ने कहा, हमें अपने पुरुष सहकर्मियों के समान ही कठोर प्रशिक्षण मिला है, और हम युद्ध के मैदान में भी वही भावना लेकर आए. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमने दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाया और एक इंच भी पीछे नहीं हटे. हमने अडिग संकल्प के साथ अग्रिम मोर्चे पर अपनी जमीन पर डटे रहे.
नियंत्रण रेखा के एक संवेदनशील क्षेत्र में किए गए इस ऑपरेशन में बीएसएफ की महिलाओं ने अपने पुरुष समकक्षों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर न केवल रणनीतिक ठिकानों की रक्षा की, बल्कि एक साहसिक जवाबी हमला भी किया. इस ऑपरेशन को अग्रिम मोर्चे की रक्षा में महिलाओं की बढ़ती भूमिका में एक मील का पत्थर माना गया है.