नई दिल्ली :- ज्योतिष शास्त्र में व्यक्ति की किसी भी समस्या का हल कुछ नियम और आसान उपायों में बताया गया है. ऐसा कहा जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को धन कमाने में बाधा आती है या फिर उसे लीवर, किडनी, पेट संबंधी समस्या, आंख, कान, गला, सांस, कब्ज या फेंफड़ों से संबंधी समस्या है तो यह गुरु कमजोर होने के संकेत हैं. ऐसी स्थिति में व्यक्ति को पुखराज रत्न पहनने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह रत्न गुरु ग्रह से संबंध रखता है और दुष्प्रभावों से बचाता है.
जब आप पुखराज रत्न धारण करते हैं तो यह आपको धन, संतान, सुख-शांति, आध्यात्मिक विकास, समृद्धि प्रदान करता है. इसके अलावा यह आपको शिक्षा के क्षेत्र में तरक्की के साथ बुद्धि वृद्धि में सहायक माना गया है. शादी में आने वाली बाधाओं को भी यह रत्न दूर करता है. लेकिन यह रत्न किसे धारण करना चाहिए और किसे नहीं और इसके क्या नियम हैं?
किसे पहनना चाहिए और किसे नहीं?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पुखराज रत्न को मेष, वृषभ, सिंह, धनु और मीन राशि के जातकों को धारण करने से शुभ परिणाम मिलते हैं. इससे आपका जीवन सुखमय होता है लेकिन, भूलकर भी वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ राशि के जातकों को पुखराज रत्न नहीं पहनना चाहिए. इसके अलावा यदि आपकी कुंडली में गुरु नीच स्थिति में है तब भी इसे धारण करने से बचना चाहिए क्योंकि, यह रत्न आपको अशुभ और नकारात्मक परिणाम प्रदान करता है.
धारण करने के नियम
– पुखराज रत्न धारण करने से पहले किसी ज्योतिषी से कुंडली में गुरु की स्थिति जरूर जान लें.– इस रत्न को हमेशा सोने की अंगूठी में ही पहनना चाहिए.– इस रत्न को पहनने के लिए गुरुवार और द्वितीया, एकादशी और द्वादशी तिथि शुभ मानी गई है.– इसे हमेशा हाथ की तर्जनी अंगुली में पहनना चाहिए.– पुखराज रत्न धारण करने से पहले ॐ बृं बृहस्पतये नम: मंत्र का जाप करें.
