Close Menu
Tv36Hindustan
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram Vimeo
    Tv36Hindustan
    Subscribe Login
    • समाचार
    • छत्तीसगढ
    • राष्ट्रीय
    • नवीनतम
    • सामान्य
    • अपराध
    • स्वास्थ्य
    • लेख
    • मध्य प्रदेश
    • ज्योतिष
    Tv36Hindustan
    Home » क्या है 50 फीसदी रिजर्वेशन सीमा, जिसे खत्म करना चाहते हैं राहुल गांधी और इसको लेकर क्या कहता है कानून…
    News

    क्या है 50 फीसदी रिजर्वेशन सीमा, जिसे खत्म करना चाहते हैं राहुल गांधी और इसको लेकर क्या कहता है कानून…

    By Tv 36 HindustanMay 2, 2025No Comments6 Mins Read
    WhatsApp Facebook Twitter Pinterest LinkedIn VKontakte Email Tumblr
    Share
    WhatsApp Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    नई दिल्ली:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 30 अप्रैल को यह घोषणा की थी कि आगामी जनगणना के साथ-साथ जाति गणना भी की जाएगी. इसके तुरंत बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत में कोटा पर 50 प्रतिशत की सीमा को हटाने की अपनी मांग दोहराई.

    राहुल गांधी ने कहा, “रिजर्वेशन पर 50 प्रतिशत की सीमा हमारे देश की प्रगति और पिछड़ी जातियों, दलितों और आदिवासियों की प्रगति में बाधा बन रही है और हम चाहते हैं कि इस बाधा को समाप्त किया जाए.

    50 प्रतिशत की सीमा के खिलाफ राहुल गांधी
    राहुल गांधी पहले भी 50 प्रतिशत की सीमा के खिलाफ बोल चुके हैं. गुजरात में अप्रैल में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की बैठक में रायबरेली के सांसद ने कहा कि पार्टी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण को 50 प्रतिशत तक सीमित करने वाली दीवार को गिरा देगी और साथ ही देश भर में जाति जनगणना के लिए जोर देगी.

    गौरतलब है कि भारत में जब भी जाति और आरक्षण पर बहस होती है तो कोटा पर 50 प्रतिशत की सीमा का जिक्र होता है. यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी 50 प्रतिशत कोटा सीमा का हवाला देते हुए आरक्षण के प्रयासों को खारिज कर दिया है.

    50 प्रतिशत कोटा सीमा कैसे डेवलप हुई?
    रिजर्वेशन पर 50 प्रतिशत की ऊपरी सीमा पिछले कुछ वर्षों में भारत के सु्प्रीम कोर्ट के फैसलों के माध्यम से विकसित हुई है. सबसे पहले 1962 में प्रसिद्ध एमआर बालाजी मामले में सुप्रीम की पांच जजों की पीठ ने कहा था कि अनुच्छेद 15(4) और 16(4) के तहत आरक्षण ‘उचित सीमा’ के भीतर रहना चाहिए और परिस्थितियों के आधार पर आदर्श रूप से 50 प्रतिशत से कम होना चाहिए.

    1992 में प्रसिद्ध इंद्रा साहनी फैसले (मंडल आयोग) में, नौ जजों की पीठ ने फैसला सुनाया कि आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत होनी चाहिए. क्योंकि वे समानता के सिद्धांत का अपवाद है. यह फैसला 50 प्रतिशत कोटा सीमा का आधार बन गया.

    2006 में एम नागराज मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों को किसी भी आरक्षण की घोषणा करने से पहले समुदायों के पिछड़ेपन और समग्र प्रभाव पर मात्रात्मक डेटा एकत्र करना चाहिए.

    मार्च 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने मराठा कोटा के बारे में एक मामले की सुनवाई करते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इस बारे में राय मांगी कि क्या वे कोटा पर अदालत द्वारा अनिवार्य 50 प्रतिशत की सीमा को पार करने के पक्ष में हैं.

    अदालत ने राज्यों से यह भी पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि 102वें संविधान संशोधन अधिनियम ने कोटा प्रदान करने की उनकी शक्ति को छीन लिया है. यह अलग बात है कि मई 2021 में कोर्ट ने मराठा कोटा को ‘असंवैधानिक’ घोषित कर दिया.

    2022 में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा 2011 में पारित उस अधिनियम को रद्द कर दिया, जिसके तहत राज्य में आरक्षण को बढ़ाकर 58 प्रतिशत कर दिया गया था.

    संविधान क्या कहता है?
    संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 भेदभाव को प्रतिबंधित करते हैं और समान अवसर सुनिश्चित करते हैं. हालांकि, यही अनुच्छेद राज्य को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के साथ-साथ अनुसूचित जातियों (SCs) और अनुसूचित जनजातियों (STs) के लिए विशेष प्रावधान करने की अनुमति देते हैं, खासकर शिक्षा और सार्वजनिक रोजगार में.

    अनुच्छेद 15(4) राज्य को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों या एससी/एसटी की उन्नति के लिए विशेष प्रावधान करने की अनुमति देता है. अनुच्छेद 16(4) पिछड़े वर्गों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण की अनुमति देता है, जिनका सार्वजनिक सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है.

    2021 में मराठा कोटा मामले के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से यह भी पूछा कि क्या 2018 के 102वें संविधान संशोधन अधिनियम ने कोटा प्रदान करने की उनकी शक्तियों को छीन लिया है।

    102वें संशोधन द्वारा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया और संविधान में अनुच्छेद 338बी और 342ए जोड़े गए, जिससे केंद्र को किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में किसी भी वर्ग या समुदाय को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा अधिसूचित करने की शक्ति मिल गई.

    इंदिरा साहनी मामले में ऐतिहासिक फैसला
    प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की सरकार ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को परिभाषित करने के मानदंड निर्धारित करने के लिए 1979 में दूसरा पिछड़ा वर्ग आयोग स्थापना की थी. इसे मंडल आयोग के नाम से जाना जाता है की स्थापना की.

    मंडल रिपोर्ट ने उस समय की 52 प्रतिशत आबादी को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (SEBCs) के रूप में पहचाना और एससी/एसटी के लिए पहले से मौजूद 22.5 प्रतिशत आरक्षण के अलावा SEBCs के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की.

    तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार, जो 1990 में मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू करना चाहती थी, लेकिन इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. 1992 में, नौ जजों की पीठ ने जिसे अब इंद्रा साहनी या मंडल आयोग के फैसले के रूप में जाना जाता है, की सुनवाई की और 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा तय की.

    क्या 50 प्रतिशत कोटा का उल्लंघन किया जा सकता है?
    इंद्रा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि असाधारण परिस्थितियों में इस सीमा का उल्लंघन किया जा सकता है. हालांकि, शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण के लिए 50 प्रतिशत की सीमा अब तक सामान्य नियम रही है, फिर भी राज्यों में इसके अपवाद हैं.

    इस फैसले पर पुनर्विचार करने का मतलब 1992 से देश में लागू आरक्षण की संरचना में बदलाव करना हो सकता है. इसके लिए ठोस डेटा की आवश्यकता होगी. केंद्र द्वारा जाति जनगणना की घोषणा के साथ, केंद्र या राज्य भारत में जातियों के बारे में नए डेटा सेट के साथ सु्प्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं. लेकिन ऐसा तभी होगा जब जनगणना हो जाएगी और संख्याएं जारी की जाएंगी, जिसमें बहुत समय लग सकता है.

    क्या ऐसे राज्य हैं जहां 50 प्रतिशत से अधिक रिजर्वेशन हैं?
    कई राज्यों ने 50 प्रतिशत की सीमा को तोड़ने का असफल प्रयास किया है. कुछ सफल भी हुए हैं। उदाहरण के लिए, तमिलनाडु में 1990 से आरक्षण कोटा 69 प्रतिशत है. सुप्रीम कोर्ट के 1992 के फैसले के बाद तमिलनाडु विधानसभा ने 1993 में अपने 69 प्रतिशत कोटे को किसी भी हस्तक्षेप से बचाने के लिए कानून पारित किया.

    तमिलनाडु की आरक्षण नीति को चुनौती देने वाला मामला 2012 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.इसके अलावा उत्तर पूर्व के राज्य – अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और सिक्किम – में 50 प्रतिशत से अधिक सीटें आरक्षित हैं, क्योंकि इन राज्यों को अपने स्वदेशी समुदायों के हित में शासन करने के लिए संविधान द्वारा अधिक स्वायत्तता दी गई है.

    Post Views: 815

    Big news community Covidrecovery PM Narendra modi नई दिल्ली रायपुर
    Share. WhatsApp Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Email Tumblr
    Previous Articleईसाई धर्म अपनाते ही खत्म हो जाता SC/ST का दर्जा, क्या है पूरा मामला…
    Next Article कोरबा मेडिकल कॉलेज और हमर लैब को सप्लाई हुई करोड़ों की टूटी फूटी मशीनें…
    Tv 36 Hindustan
    • Website

    Related Posts

    आंजनेय यूनिवर्सिटी : अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व, सामुदायिक सेवा और व्यक्तित्व विकास के नए आयाम गढ़ते हुए

    September 4, 2025

    CG: चाचा से 10 लाख की फिरौती के लिए भतीजे ने 8 साल के भाई का किया अपहरण

    August 28, 2025

    सरकारी राहत से टेक्सटाइल निवेशकों में उत्साह, Vardhman Textiles के शेयरों में तेजी

    August 28, 2025

    जापान ने छत्तीसगढ़ के करंज, साल बीज और रतनजोत में दिखाई रुचि, इनसे बनाए जाते हैं यह प्रोडक्ट

    August 28, 2025

    Comments are closed.

    Ads
               
               
    × Popup Image
    -ADS-
    -Ads-
    Ads
    Ads
    About
    About

    tv36hindustan is a News and Blogging Platform. Here we will provide you with only interesting content, and Valuable Information which you will like very much.

    Editor and chief:- RK Dubey
    Marketing head :- Anjali Dwivedi
    Address :
    New Gayatri Nagar,
    Steel Colony Khamardih Shankar Nagar Raipur (CG).

    Email: tv36hindustan01@gmail.com

    Mo No. +91 91791 32503

    Recent Posts
    • मोदी-नेतन्याहू के बीच बड़ी बैठक भारत-इजरायल के बीच हुए ये कई अहम समझौते, जेरूसलम से ‘आतंकिस्तान’ को कड़ा मैसेज…
    • सर्दी अभी गई नहीं इन 6 राज्यों में बारिश-बर्फबारी का अलर्ट, राजधानी में बढ़ेगी तपिश पढ़ें IMD अपडेट…
    • आज का राशिफल आज लक्ष्मी जी की कृपा से धन वर्षा या बढ़ेंगी परेशानियां जानिए 12 राशियों का आज का हाल…
    • गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले मरीजों एवं गंभीर रक्त विकारों से पीड़ित रोगियों को निःशुल्क रक्त सुविधा…
    • आगामी नेशनल लोक अदालत के सफल आयोजन हेतु न्यायिक अधिकारियों की द्वितीय बैठक संपन्न
    Pages
    • About Us
    • Contact us
    • Disclaimer
    • Home
    • Privacy Policy
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    © 2026 tv36hindustan. Designed by tv36hindustan.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Sign In or Register

    Welcome Back!

    Login to your account below.

    Lost password?