नई दिल्ली :- आपको बता दे की वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि यानी अक्षय तृतीया से इसकी शुरुआत हुई है. बाबा विश्वनाथ के प्रिय मास सावन तक यह क्रम निरंतर चलेगा. काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि बाबा विश्वनाथ पर जलधारी से अटूट जलाभिषेक कि परम्परा सदियों पुरानी है.बाबा विश्वनाथ के अलावा उनके भक्तों को भी गर्मी से बचाने के लिए मंदिर प्रशासन ने जरूरी इंतजाम किए है. जिसके तहत पूरे धाम परिसर में जर्मन हैंगर तकनीक से टेंट लगाया गया है.
काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में बाबा विश्वनाथ को गर्मी से राहत देने के लिए जलधारी लगाई गई है. इस जलधारी से अटूट धारा पूरे दिन बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करती रहेगी. इसके अलावा श्रृंगार के समय उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए चंदन का लेप भी किया जा रहा है.इसके अलावा बाबा विश्वनाथ के भक्तों के लिए शीतल पेय जल, ओआरएस और समय समय पर आम के पन्ने का वितरण भी किया जा रहा है.
बताते चलें कि मौसम के हिसाब से काशी में भक्त भगवान को ठंडी और गर्म चीजें अर्पित करते है. शहर के हर छोटे बड़े मंदिर में यह परंपरा दिखाई देती है. गर्मियो के सीजन में कूलर और AC लगाए जाते हैं, तो ठंड में हीटर और स्वेटर की व्यवस्था भक्त अपने आराध्य के लिए करते.
