नई दिल्ली:- भारत में खेती और पशुपालन की परंपरा बहुत प्राचीन है, और इसी वजह से देश भर में नई नस्लों की गायों और भैंसों का पालन किया जाता है। मुर्रा और जाफराबादी, दोनों ही भैंसों की उन्नत नस्लें हैं जो डेयरी उद्योग के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। इन नस्लों की खासियत है उनकी उच्च दूध उत्पादन क्षमता और शानदार गुणवत्ता का दूध।
मुर्रा और जाफराबादी भैंस दोनों ही भारतीय पशुपालकों के लिए मुख्य उत्पादन स्रोत हैं। मुर्रा भैंस का उत्पत्ति हरियाणा और पंजाब से हुआ है, जबकि जाफराबादी भैंस गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र से प्राप्त होती है। इन नस्लों के पालन से किसानों को अच्छा मुनाफा होता है और डेयरी उद्योग में उत्पादकता बढ़ती है।
मुर्रा भैंस भारत की सबसे अच्छी दूधारू नस्ल है, जिसकी दूध उत्पादन क्षमता उत्कृष्ट है। इसका रंग काला होता है और इसके सींग जलेबी की तरह घुमावदार होते हैं। मुर्रा भैंस दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में अधिक पाई जाती है। इसकी गर्भावस्था काफी लंबी होती है और यह दिन में 20 से 30 लीटर तक दूध देती है। जाफराबादी भैंस का रंग आमतौर पर काला होता है और इसका शरीर काफी बड़ा और मजबूत होता है। इसके सींग लंबे और घुमावदार होते हैं और इसकी गर्भावस्था 310 दिनों तक होती है। जाफराबादी भैंस भी दिन में 20 से 30 लीटर तक दूध दे सकती है।
