नई दिल्ली: – दिल्ली का वो बाजार जो पुरानी और सस्ती किताबों के लिए देशभर में मशहूर है। यहां दूर-दूर से लोग बाजार लेने पहुंचते हैं। अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं, तो कभी न कभी यहां जरूर गए होंगे। लेकिन क्या कभी सोचा है कि दिल्ली के इस इलाके का नाम दरियागंज क्यों पड़ा? आखिर यहां कौन सा दरिया है, जिसके नाम पर इलाके को जाना जाता है। दरियागंज का इतिहास मुगलकाल से जुड़ा हुआ है। आज हम आपको दरियागंज के नाम की रोचक कहानी बताने जा रहे हैं।
दिल्ली के दरियागंज इलाके का नामकरण और इतिहास बहुत ही दिलचस्प है। दरियागंज दो शब्द दरिया और गंज से मिलकर बना है। यहां दरिया का अर्थ नदी और गंज का मतलब बाजार से है, यानी नदी के किनारे का बाजार। दरअसल ये इलाका यमुना नदी के किनारे है। यह इलाका मुगल सम्राट शाहजहां के शासनकाल में बसाया गया था और इसका नाम यमुना नदी के किनारे होने के कारण पड़ा
दरियागंज दिल्ली के उन प्रमुख इलाकों में से एक है जो अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। यहां की तंग गलियां और बाजार मुगल कालीन वास्तुकला और संस्कृति की झलक प्रस्तुत करते हैं। दरियागंज ने अपने इतिहास में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और यह इलाका आज भी दिल्ली की धड़कन के रूप में जीवंत है। ये इलाका पुरानी दिल्ली में है। यहां आज भी पुरानी दुकानें और इमारते हैं।दरियागंज दिल्ली गेट से शुरू होकर नेताजी सुभाष रोड और लाल किले तक फैला हुआ है। यह इलाका अपने रविवार पुस्तक बाजार के लिए भी प्रसिद्ध है, जहां लोग मुनासिब दामों में किताबें खरीद सकते हैं।
