नई दिल्ली:- अप्रैल के पहले सप्ताह में थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में होने वाली बिम्सटेक की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के बीच वार्ता नामुमकिन लग रही है.
राजनीतिक संवेदनशीलता और रणनीतिक सावधानी के चलते बैंकॉक में होने वाली बिम्सटेक की बैठक में मोदी-यूनुस की औपचारिक द्विपक्षीय बैठक की संभावना ना के बराबर है. इसके पीछे की वजह ये है कि भारत शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश के मुद्दे पर फूंक-फूंककर कदम बढ़ा रहा है.
गौर करें तो बांग्लादेश की अंतरिम सरकार अंतर्राष्ट्रीय मान्यता चाहती है, इसलिए अप्रैल के पहले सप्ताह में बैंकॉक में होने वाले बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में बांग्लादेश सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बैठक ढाका के लिए एक कूटनीतिक सफलता हो सकती है. लेकिन हालात के मुताबिक ऐसा होता दिख नहीं रहा है. ढाका के लगातार प्रयास के बावजूद भारत बांग्लादेश से एक निश्चित दूरी बनाए हुए है.
मोहम्मद यूनुस ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या और ईद-उल-फितर से कुछ दिन पहले मंगलवार शाम को राष्ट्र के नाम अपना संदेश दिया. इस संबोधन में यूनुस ने अपने देश बांग्लादेश, भारत, भूटान और नेपाल के बीच क्षेत्रीय सहयोग के महत्व पर खास जोर दिया.
अपने भाषण में यूनुस ने कहा, “हमारे देश की भौगोलिक स्थिति सौभाग्यशाली है. समुद्र से हमारे संबंध भारत, भूटान और नेपाल के लिए फ़ायदेमंद हैं.
उन्होंने भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र का जिक्र करते हुए इस बात पर जोर दिया कि बांग्लादेश के विकास से भूटान, नेपाल और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को लाभ होगा.
गौर करें तो मोहम्मद यूनुस की यह टिप्पणी बांग्लादेश के विदेश सचिव मोहम्मद जशीमुद्दीन के बयान के तुरंत बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ढाका ने बैंकॉक में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान यूनुस और मोदी के बीच संभावित बैठक की मुकम्मल तैयारी कर ली है. उन्होंने ये कहा था कि अब बांग्लादेश इसको लेकर भारत से सकारात्मक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है.
हालांकि, पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस तरह की बैठक से दूरी बनाने के लिए भारत की रणनीतिक और घरेलू राजनीतिक स्थिति एक बड़ा कारण है. आज के दिन भारत बांग्लादेश के अंतरिम नेतृत्व के साथ नजदीकियां बढ़ाकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता है. इसके पीछे की वजह ये है कि ढाका की अंतरिम सरकार के पास लोकतांत्रिक जनादेश नहीं है. साथ ही उसका सत्ता में आना भी विवादास्पद बना हुआ है. ऐसे में भारत ने संकेत दिया है कि वह इस तरह की बैठक के लिए इच्छुक नहीं है. इस सिलसिले में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी कहा था कि उनके पास इस तरह की मीटिंग का कोई अपडेट नहीं है. वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी संसद की सलाहकार समिति के सामने कहा था कि बिम्सटेक के दौरान इंडिया के साथ बांग्लादेश सरकार का मीटिंग के लिए रिक्वेस्ट आया है, जिस पर अभी विचार किया जा रहा है.
जान लें कि अगस्त 2024 में पीएम शेख हसीना की छुट्टी होने के बाद बांग्लादेश में अंतरिम सरकार राजकाज चला रही है. इस सरकार का नेतृत्व अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस कर रहे हैं. वहीं शेख हसीना ने भारत की शरण ले रखी है. उधर सत्ता परिवर्तन के इस दौर में बांग्लादेश में व्यापक हिंसा हुई थी. कट्टरपंथी तत्वों का बड़े पैमाने पर उदय हुआ था. इस दौरान अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं पर बहुत से जुल्म ढाए गए थे. इसको लेकर भारत ने लगातार अपनी चिंताओं से ढाका को अवगत कराया था.
ढाका से पत्रकार सैफुर रहमान तपन ने ईटीवी भारत को फोन पर बताया कि मोहम्मद यूनुस की बांग्लादेश, भारत, नेपाल और भूटान के बीच क्षेत्रीय सहयोग के महत्व को लेकर ये टिप्पणी पिछली हसीना सरकार की ही तरह ही है. तपन ने कहा कि बीते अगस्त माह में सत्ता की बागडोर संभालने के बाद यूनुस ने भारत विरोधी कई बयान दिए थे. हालांकि हाल ही में एक ब्रिटिश मीडिया से बातचीत में उन्होंने भारत और उसके सहयोग की तारीफ की थी. इसके साथ ही मोहम्मद यूनुस ने लगभग मृत पड़े सार्क समूह को जिंदा करने पर जोर दिया. जान लें कि सार्क संगठन में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, इंडिया, मालद्वीव, पाकिस्तान और श्रीलंका शामिल हैं.
उधर सार्क के निष्क्रिय होने पर भारत ने बीते कई सालों से बिम्सटेक यानी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल को महत्व देना शुरू कर दिया है. बिम्सटेक में भारत के अलावा बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, म्यांमार, थाईलैंड और श्रीलंका शामिल है. भारत पड़ोसी फर्स्ट की नीति के तहत बिम्सटेक देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है. इसके साथ ही इंडिया आसियान देशों के साथ बेहतर रिलेशन बनाए हुए है. इन आसियान देशों में ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं.
वहीं पिछले महीने, ओमान में आयोजित 8वें हिंद महासागर सम्मेलन में बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुसैन के साथ अपनी बैठक भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्षेत्रीय सहयोग के लिए सार्क की तुलना में बिम्सटेक के महत्व पर जोर दिया था.
इन सबके बीच बैंकॉक में पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस के बीच बैठक के बारे में अनिश्चितता बनी हुई है. इस बारे में ढाका से पत्रकार तपन कहते हैं कि इस बात पर उन्हें संदेह है कि बैंकॉक में पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस के बीच वार्ता होगी. वो कहते हैं कि भारत बांग्लादेश की चुनी हुई सरकार के प्रतिनिधि से बात करना चाहती है, न कि गैर प्रजातांत्रिक सरकार के प्रतिनिधि से.
मंगलवार को अपने संबोधन में मोहम्मद यूनुस ने राष्ट्र के नाम अपने संदेश में कहा था कि बांग्लादेश में संसदीय चुनाव इस वर्ष दिसंबर से अगले वर्ष जून 2026 के बीच में होंगे। इसको लेकर तपन के अनुसार बांग्लादेश में चुनाव इस साल दिसंबर में नई कार्यवाहक सरकार के तहत होंगे. उन्होंने जोर देकर कहा कि ये चुनाव मो. यूनुस के नेतृत्व वाली मौजूदा अंतरिम सरकार के तहत चुनाव होना मुश्किल है. अपने दावे की मजबूती के लिए तपन ने बांग्लादेश के संविधान के 13वें संशोधन को पुनर्जीवित करने की याचिकाओं का उल्लेख किया. इन याचिकाओं के जरिए कार्यवाहक सरकार की वैधता को बहाल करने का प्रयास हो रहा है.
हालांकि इन सबके बीच बांग्लादेश की राजनीति और अर्थव्यवस्था के जानकार एक भारतीय विशेषज्ञ ने ये उम्मीद जताई है कि नरेंद्र मोदी और मोहम्मद यूनुस के बीच बैंकॉक में बैठक होगी.
बांग्लादेश की राजनीति पर अच्छी पकड़ रखने वाले इस विशेषज्ञ ने अपना नाम न छापने की शर्त पर ईटीवी भारत को बताया, “चूंकि दोनों नेता एक ही समय पर एक ही स्थान पर होंगे, इसलिए दोनों के बीच बातचीत होगी, चाहे वह छोटी हो या लंबी।” “मैं इस तरह की बैठक की द्विपक्षीय औपचारिकताओं के बारे में नहीं बोल सकता, लेकिन यह नई दिल्ली और ढाका दोनों के हित में होगा कि वे एक-दूसरे के साथ जुड़े रहें।