नई दिल्ली:- तीन फेज की वोटिंग बाकी है. दिल्ली में छठे फेज के तहत 25 मई को वोट डाले जाएंगे. दिल्ली में 7 लोकसभा सीटें हैं और इन सभी पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा है. इस बार बीजेपी ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली को छोड़कर बाकी 6 सीटों पर कैंडिडेट बदल दिए हैं. कभी एक-दूसरे की धुर-विरोधी रही कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इस बार के लोकसभा चुनाव में हाथ मिला लिया है. INDIA गठबंधन के तहत आप दिल्ली की 4 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि कांग्रेस ने 3 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं. आइए समझते हैं कि दिल्ली में क्या इस बार भी बीजेपी क्लीन स्वीप कर पाएगी या कांग्रेस-AAP की दोस्ती कोई कमाल करेगी-
दिल्ली में इस सीट से इस पार्टी का उम्मीदवार-
- नई दिल्ली सीट पर बीजेपी ने दिवंगत सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी स्वराज को मौका दिया है. INDIA अलायंस से आप ने सोमनाथ भारती को उतारा है.
- चांदनी चौक से प्रवीण खंडेलवाल बीजेपी उम्मीदवार हैं. इंडिया अलायंस से कांग्रेस ने जेपी अग्रवाल पर दांव खेला है.
- पूर्वी दिल्ली सीट से बीजेपी ने हर्ष मल्होत्रा को टिकट दिया है, जबकि आप से कुलदीप कुमार मैदान में हैं.
- उत्तर-पूर्वी दिल्ली से बीजेपी ने एक बार फिर से मनोज तिवारी को मौका दिया है, जबकि इसी सीट से कांग्रेस के टिकट पर कन्हैया कुमार अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं.उत्तर-पूर्वी दिल्ली से बीजेपी ने एक बार फिर से मनोज तिवारी को मौका दिया है, जबकि इसी सीट से कांग्रेस के टिकट पर कन्हैया कुमार अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं.
- उत्तर-पश्चिमी दिल्ली से योगेंद्र चंदौलिया BJP के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस ने यहां से उदित राज को उतारा है.
- पश्चिमी दिल्ली से बीजेपी ने कमलजीत शहरावत को मौका दिया है. आप ने महाबल मिश्रा पर भरोसा जताया है.
- दक्षिणी दिल्ली से रामवीर सिंह बिधूड़ी बीजेपी के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं, जबकि आप ने सहीराम पहलनवान को मौका दिया है.
2004 और 2009 के इलेक्शन में टॉप गियर में कांग्रेस
2004 औ 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने टॉप परफॉर्मेंस दिया था. पार्टी ने 2004 में दिल्ली की 7 में से 6 सीटें जीती थी. उसे 55% वोट मिले थे. 2009 के इलेक्शन में कांग्रेस ने 7 में से 7 सीटें जीत ली. वोट शेयर बढ़कर 57% हो गया. 2014 में मोदी लहर में कांग्रेस नाकाम रही. कांग्रेस का वोट शेयर गिरकर 15% हो गया. एक भी सीटें नहीं मिली. जबकि 2019 के इलेक्शन में कांग्रेस का वोट शेयर बढ़कर 23% तो हुआ, लेकिन इस बार भी कोई सीट नहीं मिली. दोनों चुनावों में बीजेपी ने सभी सीटें जीती थीं. 2014 में बीजेपी का वोट शेयर 46% और 2019 में 57% रहा. इससे पहले 2014 के चुनाव में बीजेपी ने एक सीट जीती थी. 2009 के चुनाव में पार्टी को कोई सीट नहीं मिली थी. 2014 और 2019 के इलेक्शन में आम आदमी पार्टी बैकफुट पर थी.
दिल्ली में जिसकी रफ़्तार, उसी की सरकार
CSDS लोकनीति के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में जिस पार्टी की धमक रही, केंद्र में भी उसी की सरकार बनी. 1998 के इलेक्शन में BJP ने दिल्ली की 6 सीटें जीती. केंद्र में BJP प्लस की सरकार बनी. इसी तरह 1999 में पार्टी ने 7 सीटों पर जीत हासिल की और केंद्र में सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार बनाई. 2004 में कांग्रेस ने दिल्ली की 6 सीटें जीती और केंद्र में UPA की सरकार बनी. 2009 में पार्टी ने सभी 7 सीटें जीती और केंद्र में सरकार रिपीट हुई. इसी तरह 2014 और 2019 के इलेक्शन में BJP ने दिल्ली में क्लीन स्वीप किया और केंद्र में मोदी की सरकार बनी.
दिल्ली में आप तो केंद्र में बीजेपी के साथ वोटर
दिल्ली को लेकर एक और बात कही जाती है कि यहां के वोटर राज्य सरकार के लिए आप के साथ हैं, लेकिन केंद्र सरकार की बात हो, तो ये वोटर बीजेपी के साथ आ जाते हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली में कांग्रेस का वोट शेयर 15% था. बीजेपी का वोट शेयर 46% और आप का वोट शेयर 33% रहा. जबकि 2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर 10%, बीजेपी का वोट शेयर 32% और आप का वोट शेयर 54% रहा. 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर 23%, बीजेपी का वोट शेयर 57% और आप का वोट शेयर 18% रहा. जबकि 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर महज 4% था. बीजेपी का वोट शेयर 39% और आप का 54% था.
पॉलिटिकल एनालिस्ट अमिताभ तिवारी कहते हैं, “दिल्ली की 7 सीटों पर अभी BJP का होल्ड है. लेकिन AAP-कांग्रेस भी जोर लगा रही है. खासकर नॉर्थ ईस्ट सीट पर पूर्वांचल और मुसलमानों की एक बड़ी आबादी है. यहां बीजेपी से भोजपुरी एक्टर मनोज तिवारी को फिर से उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस ने कन्हैया कुमार को टिकट देकर इस सीट पर मुकाबला रोमांचक कर दिया है. अगर कांग्रेस-AAP के वोट जोड़ दें तो भी नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ता दिख रहा है.
