नई दिल्ली. दीवाली के मौके पर अपने करीबी और प्रियजनों को गिफ्ट देना एक परंपरा है. गिफ्ट की कीमत कई बार रिश्तों की गहराई पर निर्भर करती है. कंपनियां भी दिवाली के मौके पर अपने कर्मचारियों को उपहार देती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये गिफ्ट और बोनस आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल सकते हैं? जी हां, इनकम टैक्स के नियमों (Income Tax Rules) के तहत आपको इन पर टैक्स देना पड़ सकता है. कंपनी से मिलने वाले गिफ्ट और बोनस सिर्फ खुशियां ही नहीं, बल्कि टैक्स लायबिलिटी भी लेकर आते हैं.
इनकम टैक्स नियमों के अनुसार, अगर आपके दीवाली गिफ्ट की कीमत एक निश्चित सीमा से अधिक है या अगर आपका बोनस कुछ तयशुदा लिमिट से ऊपर है, तो उस पर आपको टैक्स देना पड़ सकता है. यानी कि दीवाली का यह तोहफा आपके लिए खुशी तो ला सकता है, लेकिन साथ ही टैक्स का भार भी जोड़ सकता है.
कब लगता है गिफ्ट टैक्सइनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 56(2)(x) के तहत करदाता को मिले गिफ्ट्स पर टैक्स की देनदारी बनती है. हालांकि, भारत में किसी व्यक्ति को प्राप्त सभी गिफ्ट टैक्स के अधीन नहीं हैं. आयकर अधिनियम, 1962 के प्रमुख प्रावधान आपको विभिन्न टैक्स-फ्री गिफ्ट प्राप्त करने की अनुमति देते हैं. अगर आपको एक वित्तीय वर्ष में 50,000 रुपये तक का कोई गिफ्ट मिला है तो इस पर कोई गिफ्ट टैक्स नहीं देना होगा. गिफ्ट पर लगने वाला आयकर किसी एक उपहार पर नहीं लगता है, बल्कि यह एक वित्त वर्ष में मिले कुल गिफ्ट्स पर लगता है.इन लोगों से मिले गिफ्ट्स पर नहीं लगता टैक्सपति या पत्नी, भाई या बहन और अन्य करीबी रिश्तेदारों से मिले गिफ्ट पर टैक्स नहीं लगता है.
विरासत या वसीयत में मिला उपहार स्वरूप मिली संपत्ति.हिंदू अविभाजित परिवार के मामले में किसी भी सदस्य से मिला गिफ्ट.पंचायत, नगर पालिका, किसी फाउंडेशन, यूनिवर्सिटी, धार्मिक संस्था और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन से मिला उपहार.कंपनी से मिला गिफ्ट कब होता है टैक्स फ्री?नौकरीपेशा व्यक्ति को अपनी कंपनी से एक वित्त वर्ष में 5,000 रुपये मूल्य तक का मिला उपहार टैक्स फ्री है, लेकिन अगर यह वैल्यू 5,000 रुपये से ज्यादा होती है तो अतिरिक्त रकम को आपकी सैलरी से हुई आमदनी माना जाएगा और उस पर इनकम टैक्स देना होगा
