नई दिल्ली:- क्या 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर होने वाले केंद्र सरकार के पेंशनहोल्डर्स 8वें वेतन आयोग के तहत मिलने वाले ज्यादातर लाभों से वंचित हो जाएंगे? इसको लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच चिंता बढ़ गई है. ऐसा दावा किया जा रहा है कि केंद्र फाइनेंस बिल, 2025 में संशोधन के जरिए पेंशनभोगियों के दो ग्रुप में बांटने की कोशिश कर रहा है.इनमें एक ग्रुप वह है जिसमें जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारी शामिल हैं, जबकि दूसरे ग्रुप में उसके बाद रिटायर होने वाले कर्मचारी हैं.
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पेंशन नियमों में किए गए हालिया संशोधनों को केंद्र सरकार का छिपा हुआ एजेंडा मानती है. हालांकि, सरकार ने कहा कि हाल ही में किए गए संशोधन मौजूदा पेंशन नीतियों का सिर्फ एक वैलिडेशन है और इनका उद्देश्य सिविल और रक्षा पेंशनभोगियों के लिए लाभों में बदलाव करना नहीं है.
पेंशन विवाद क्यों उठा?
यह मुद्दा ऐसे समय में उठा है, जब वित्त विधेयक 2025 में केंद्रीय सिविल सेवा (CCS) पेंशन नियमों में कुछ बदलाव किए गए है. इसे लेकर ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस और कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल जैसे नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार 2026 से पहले रिटायर हो चुके या रिटायर होने वाले पेंशनभोगियों को 8वें वेतन आयोग के लाभों से वंचित कर सकती है.
रिपोर्ट के मुताबिक AITUC की अमित्राजीत कौर ने इसे लाखों पेंशनभोगियों के साथ विश्वासघात बताया, जबकि वेणुगोपाल ने इसे सरकार का छिपा हुआ एजेंडा करार दिया. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि 8वें वेतन आयोग से सरकार पर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय बोझ पड़ सकता है, जिससे यह बदलाव जरूरी हो गया है.
वित्त मंत्री ने क्या कहा?
हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन अटकलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. सीतारमण ने राज्यसभा में वित्त विधेयक 2025 और विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2025 पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि पेंशन नियमों में हालिया संशोधन मौजूदा नीतियों का वैलिडेशन मात्र है और इससे सिविल या रक्षा पेंशनभोगियों को मिलने वाले लाभों में कोई बदलाव नहीं होगा.
8वां वेतन आयोग का क्या होगा प्रभाव ?
सरकार ने जनवरी 2025 में 8वें वेतन आयोग को मंजूरी दी थी, जो 1 जनवरी 2026 से लागू होगा. इसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्ते और पेंशन में सुधार करना है. इससे पहले2016 में लागू हुए 7वें वेतन आयोग ने यह सुनिश्चित किया कि 2016 से पहले और बाद में रिटायर हुए पेंशनभोगियों को एक समान पेंशन मिले. यानी पुराने और नए पेंशनभोगियों के बीच कोई भेदभाव न हो.सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1 मार्च 2025 तक करीब 36.57 लाख सरकारी कर्मचारी और 33.91 लाख पेंशनभोगी इस आयोग से प्रभावित होंगे.
बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 27 मार्च 2025 को भी संसद में इस विवाद पर सफाई दी थी. उन्होंने कहा, “2016 से पहले रिटायर हुए पेंशनभोगियों को 7वें वेतन आयोग के तहत 2016 के बाद रिटायर हुए पेंशनभोगियों के बराबर लाभ मिले और यह सिद्धांत जारी रहेगा.”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वित्त विधेयक में किया गया बदलाव केवल प्रक्रियागत सुधार है, पेंशन से संबंधित कोई भेदभाव नहीं है. इससे पहले 18 मार्च 2025 को उन्होंने सांसद कंगना रनौत और सजदा अहमद के सवाल के जवाब में कहा था कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा और इसके वित्तीय प्रभाव का आकलन बाद में किया जाएगा.
तो क्या बुजुर्ग पेंशनभोगियों को नुकसान होगा?
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य पेंशन गणना को सरल बनाना है. बुजुर्ग पेंशनभोगियों को इससे बाहर करना नहीं है. 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में आएंगी और तब तक सभी पेंशनभोगियों के लिए संशोधन किए जाने की संभावना है. इससे पहले भी सरकार ने वेतन आयोग को लागू करते समय एक साल का एरियर दिया है, जिससे वित्तीय दबाव कम हो सकता है.
उल्लेखनीय है कि अभी तक इस बात के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं कि बुजुर्ग पेंशनभोगियों को 8वें वेतन आयोग से बाहर रखा जाएगा. वित्त मंत्री के बयान के मुताबिक, सभी पेंशनभोगियों को वेतन आयोग का लाभ मिलेगा. 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों की रूपरेखा अप्रैल 2025 तक तय होने की उम्मीद है. ऐसे में पेंशनभोगियों को आधिकारिक घोषणाओं पर ध्यान देना चाहिए.