नई दिल्ली:- बिहार में चुनाव से पहले वैसे तो हर बार राजनीतिक पार्टियां जातिगत समीकरण के जोड़ तोड़ में जुट जाती है, मगर इतिहास गवाह है कि इन तमाम समीकरण जोड़ तोड़ के बावजूद भाजपा अपने अकेले के दम पर कभी बिहार में सत्ता हासिल नहीं कर पाई. शायद यही वजह है कि, इस बार भाजपा हर हाल में बिहार की राजनीतिक दशा दिशा बदलने की कोशिश में है.
इसके लिए शुरुआत में ही दिग्गजों हिंदुत्व का एजेंडा सेट कर ही चुनाव प्रचार में आगे बढ़ना चाहती है. मजेदार बात तो यह है कि, बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बिहार के गोपालगंज में अपना डेरा डाले हुए हैं जो कि, राजद प्रमुख लालू यादव का गृह क्षेत्र है. धीरेन्द्र शास्त्री ने वैसे तो बिहार पहुंचते ही यह साफ कर दिया कि वो किसी एजेंडे के तहत नहीं बल्कि हिंदुत्व के जन जागरण के लिए बिहार पहुंचे हैं और लोगों को कथा सुनाने आए हैं.
मगर वहीं उनके इस बयान जिसमें उन्होंने कहा कि “हमें छेड़ेंगे तो हम छोड़ेंगे नहीं” ने सियासत जरूर गरमा दी है. यही नहीं उन्होंने सीधे तौर पर लालू यादव के गृह क्षेत्र में ही बिखरे हुए हिन्दुओं को एक साथ लाने की बात कहकर विपक्ष को मुश्किल में जरूर डाल दिया है. वह इसलिए क्योंकि धीरेन्द्र शास्त्री की कथा और दर्शन में भारी भीड़ जमा हो रही है.
वहीं दूसरी तरफ आर्ट ऑफ लिंविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर गुरुवार को बिहार दौरे पर पहुंच गए हैं. बिहार पहुंचने पर श्री श्री रविशंकर ने गुरुवार को ही बीजेपी नेता और बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी से मुलाकात की. रविशंकर ने ये भी कहा कि, बिहार अब पिछड़ा राज्य नहीं रहा, अब आगे बढ़ रहा है. यहां ऐसे ऊर्जावान नेता हैं,जो प्रदेश के विकास में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
श्री श्री रविशंकर तीन दिन तक राज्य के दौरे पर रहेंगे. इस दौरान औरंगाबाद और पटना में उनके भव्य सतसंग के कार्यक्रम के आयोजन होने हैं. गांधी मैदान में शुक्रवार से दो सत्संग में ध्यान, योग और जीवन जीने की कला पर रविशंकर प्रवचन देंगे. श्री श्री रविशंकर 1000 साल पुराने पवित्र शिवलिंग को लेकर बिहार पहुंचे हैं, जिसको महमूद गजनवी ने 1026 ईस्वी में खंडित किया था. इस शिवलिंग को वो जनता के दर्शनाथ भी रखेंगे.
वहीं इसके अलावा संघ प्रमुख मोहन भागवत बिहार के पांच दिन के दौर पर पहले से हैं. गुरुवार को सुपौल में उन्होंने एक स्कूल का उद्घाटन भी किया और 9 मार्च तक मुजफ्फरपुर में ही वो कैंप भी करने वाले हैं. इस दौरान मोहन भागवत, संघ के स्वयंसेवकों और बीजेपी के नेताओं से मुलाकात-संवाद भी करेंगे. साथ ही बिहार में मौजूद कुछ संघ की शाखाओं में भी जा सकते हैं.
वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा,कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पहले ही बिहार में चुनावी दौरे की शुरुआत कर चुके हैं. मगर धर्मगुरु,आध्यात्मिक गुरु और संघ प्रमुख के लंबे लंबे दौरे ने हिंदुत्व का तड़का और भाजपा के लिए जमीन तैयार करने में इस बार काफी हद तक भूमिका में नजर आ रहे हैं.
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि, भाजपा ने जिस तरह महाराष्ट्र में बंटेंगे तो कटेंगे,और दिल्ली में एक हैं तो सेफ हैं, जैसे मुद्दों पर अपने वोट की फसल काटी, उसी फार्मूले पर आगे बढ़ते हुए इस बार भाजपा पहले से ही बिहार की चुनावी हवा में हिंदुत्व के एजेंडे का तड़का लगाने को तैयार दिख रही है.
बिहार के मुद्दे पर बोलते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन का कहना है कि, बिहार में डबल इंजन की सरकार ने जितना काम किया है वो आज तक कभी नहीं हुआ था. आज वहां की जनता, महिलाएं नीतीश कुमार के शासन में सुरक्षित महसूस कर रहीं है.
उन्होंने कहा कि, बिहार में हर तरफ विकास हुआ है. प्रधानमंत्री और केंद्र की पहल पर बिहार को विशेष पैकेज भी दिया गया है, इसलिए बिहार को जनता नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ही साथ देगी और वहां फिर से एनडीए की ही सरकार बनेगी.
बताते चले कि, मध्य प्रदेश चुनाव से ठीक पहले बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदुत्व की यात्रा निकाली थी जिसने मध्य प्रदेश चुनाव की काफी हद तक दशा दिशा बदल कर रख दी थी.कुछ ऐसा ही माहौल अब बिहार में भी बनता नजर आ रहा है.
बिहार चुनाव से पहले बिहार में बाबाओं का डेरा वैसे तो हिंदुत्व और धार्मिक आस्था के नाम पर है. मगर कहीं ना कहीं हिंदुत्व के एजेंडे पर जमीन जरूर तैयार हो रही है. बाबा ही नहीं अब संघ प्रमुख मोहन भागवत भी बिहार के पांच दिनों के दौरे पर हैं, ऐसे में बिहार की राजनीति किस करवट लेती है यह तो आने वाला समय ही तय करेगा.