नई दिल्ली: – दुनिया में जब भी ब्लड ग्रुप्स की बात होती है, हम आमतौर पर A, B, AB और O ग्रुप के बारे में जानते हैं. लेकिन विज्ञान की दुनिया में इनसे कहीं आगे की एक ऐसी खोज हुई है, जिसने मेडिकल साइंस को चौंका दिया है. एक ऐसा ब्लड ग्रुप जो पूरी धरती पर सिर्फ एक इंसान में पाया गया है. इसे नाम दिया गया है ‘ग्वाडा नेगेटिव’ यानी Gwada Negative. इस खोज को जून 2025 में मिलान में हुए ISBT सम्मेलन में आधिकारिक मान्यता मिली.
क्या है ‘Gwada Negative’?
‘Gwada Negative’ कोई आम ब्लड ग्रुप नहीं. यह दुनिया का 48वां आधिकारिक ब्लड ग्रुप सिस्टम है, जिसे जून 2025 में इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन (ISBT) ने मान्यता दी है. इस ब्लड ग्रुप की खोज फ्रेंच ब्लड एस्टैब्लिशमेंट (EFS) ने की थी, और यह ब्लड ग्रुप फिलहाल सिर्फ ग्वाडेलूप (Guadeloupe) की एक 68 वर्षीय महिला में ही पाया गया है
इस ब्लड ग्रुप को EMM-negative system के रूप में क्लासिफाई किया गया है. EMM वह एंटीजन है जो आमतौर पर लगभग हर व्यक्ति के रेड ब्लड सेल्स पर पाया जाता है. लेकिन इस महिला में इसकी पूरी तरह से गैर-मौजूदगी ने मेडिकल साइंस को हैरान कर दिया.
खोज की शुरुआत और 15 साल पुराना रहस्य
इस रहस्यमयी ब्लड ग्रुप की कहानी 2011 में शुरू होती है, जब ग्वाडेलूप मूल की एक महिला, जो पेरिस में रहती थी, की एक सामान्य सर्जरी से पहले ब्लड टेस्ट किया गया. उस दौरान वैज्ञानिकों को उसमें एक ऐसा एंटीबॉडी मिला, जो किसी भी ज्ञात ब्लड ग्रुप सिस्टम से मेल नहीं खाता था.
उस समय, तकनीकी संसाधन इतने उन्नत नहीं थे कि इस अजीब रक्तप्रकार की पहचान की जा सके. लेकिन 2019 में, नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) तकनीक की मदद से वैज्ञानिकों ने इस महिला के पुराने सैंपल की दोबारा जांच की और आखिरकार इस अनोखे ब्लड ग्रुप का रहस्य सुलझाया.
क्यों है इतना दुर्लभ?
‘Gwada Negative’ का मतलब है कि उस महिला के खून में EMM एंटीजन पूरी तरह से गायब है. यह बेहद दुर्लभ स्थिति है क्योंकि EMM एक हाई-इंसीडेंस एंटीजन है जो लगभग सभी इंसानों में पाया जाता है. इसका न होना, उस व्यक्ति को मेडिकल दृष्टि से एकमात्र बना देता है.
EFS के प्रमुख बायोलॉजिस्ट थियरी पेयरार्ड के अनुसार, इस महिला को यह ब्लड ग्रुप पैतृक और मातृ दोनों ओर से म्यूटेटेड जीन मिलने के कारण मिला. पेयरार्ड ने बताया कि ‘यह महिला सिर्फ खुद के खून से ही संगत है’, यानी दुनिया में आज कोई भी दूसरा डोनर उसे ब्लड नहीं दे सकता.
क्या है इसका महत्व?
इस खोज का महत्व सिर्फ विज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि यह रेयर ब्लड डिसऑर्डर्स से जूझ रहे लोगों के लिए नई उम्मीद बन सकती है. EFS ने अपने बयान में कहा, ‘हर नया ब्लड ग्रुप सिस्टम हमारी हेल्थकेयर की क्षमताओं को और बेहतर करता है, खासकर उन मरीजों के लिए जिनके ब्लड टाइप दुर्लभ हैं.’
