नई दिल्ली:- ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे वह राजमार्ग है जो आबादी वाले इलाकों से दूर खेतों या अन्य खाली जगहों में बनाया जाता है। इसका उद्देश्य यातायात को कम करना और पर्यावरण को बचाना है। इन राजमार्गों के दोनों तरफ वृक्षों का पौधारोपण किया जाता है जो ध्वनि और वायु प्रदूषण को कम करते हैं और राजमार्ग को मजबूत बनाते हैं।
भारत में ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की शुरुआत 2015 में हुई थी जब सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इसकी नीति की घोषणा की थी। इसके तहत नेशनल ग्रीन हाइवेज मिशन का गठन किया गया था जिसका लक्ष्य राज्यों में सुरक्षित और हरित राजमार्ग गलियारों का विकास करना था।
अलीगढ़-आगरा के बीच कैसा होगा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे
अलीगढ़ और आगरा के बीच का सफर अभी तक बहुत लंबा और थकाने वाला है क्योंकि इस रास्ते पर बस एक टू लेन हाईवे है जो अनेक शहरों और गांवों से गुजरता है। इस हाईवे पर टोल भी लगता है और यातायात भी बहुत होता है। इसलिए इस मार्ग को तय करने में ढाई से तीन घंटे का समय लग जाता है।
इस समस्या को दूर करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने एक नया फोरलेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रस्तावित किया है जो खंदौली पर यमुना एक्सप्रेसवे से शुरू होकर हाथरस की सीमा में होते हुए अलीगढ़ में दिल्ली-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ेगा। इस एक्सप्रेसवे की लंबाई लगभग 85 किलोमीटर होगी और इसका निर्माण लगभग 2000 करोड़ रुपये में होगा।
इस एक्सप्रेसवे के बनने से अलीगढ़ और आगरा के बीच का सफर सिर्फ एक घंटे में हो जाएगा और यात्रियों को टोल भी नहीं देना पड़ेगा। इससे न केवल यातायात की समस्या कम होगी बल्कि पर्यावरण को भी लाभ होगा।
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण कब शुरू होगा
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण शुरू करने के लिए एनएचएआइ ने एक एजेंसी को चुनना है जो इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करेगी। इस रिपोर्ट में एक्सप्रेसवे का रूट, भूमि अधिग्रहण, वित्तीय आकलन, तकनीकी विश्लेषण और अन्य महत्वपूर्ण बिंदु शामिल होंगे। इसके बाद एनएचएआइ इस रिपोर्ट को मंजूरी के लिए सरकार को भेजेगा।
