*मध्यप्रदेश:-* बीते कुछ सालों में कुत्तों के हमले की खबरें इतनी बढ़ीं कि इसने अखबारों के पहले पन्ने पर भी जगह पाई। इन खबरों को अलग बनाया विदेशी नस्ल के खूंखार कुत्तों ने। ये कुत्ते हमला करते समय आपा खो देते हैं, आदमखोर जानवरों की तरह पेश आते हैं। जब ये गुस्से में होते हैं, अपने मालिक की जान तक ले लेते हैं।केंद्र सरकार ने घर या फ्लैट में विदेशी नस्ल के कुत्तों के बढ़ते हमलों को देखते हुए इसे गंभीरता से लिया है। सरकार 23 विदेशी नस्ल के खतरनाक कुत्तों के इंपोर्ट, प्रजनन और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है।इन नस्लों में रॉटविलर, पिटबुल टैरियर, अमेरिकन बुलडॉग, वुल्फ और मास्टिफ जैसे बड़े डील-डौल वाले कुत्ते शामिल हैं। इन्हें इंसानों के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। प्रतिबंध में इन नस्लों की मिश्रित और संकर नस्लें भी शामिल होंगी।इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हम जानेंगे कि कौन से डॉग बैन हो सकते हैं? साथ ही जानेंगे कि-क्यों इन कुत्तों को बैन किया गया है?जिन लोगों के पास यह कुत्ते हैं वह क्या करें?एक्सपर्ट- डॉ. आदेश कुमार वर्मा, पशुचिकित्सा सलाहकार, असिस्टेंट प्रोफेसर केएपीजी कॉलेज, प्रयागराजसवाल- केंद्र सरकार ने कुत्तों को लेकर यह निर्णय क्यों लिया है?जवाब- पिछले कुछ महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से विदेशी नस्ल के खतरनाक कुत्तों के जानलेवा हमले के मामले सामने आए। इसे लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई। याचिका के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए थे कि विदेशी नस्ल के खतरनाक कुत्तों को लेकर तीन महीने के भीतर कोई फैसला ले। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद एनिमल वेलफेयर बॉडीज और एक्सपर्ट्स की एक कमेटी गठित की गई। इस एक्सपर्ट्स कमेटी ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें उन्होंने कहा कि ये विदेशी नस्ल के कुत्ते भारत के लिए उग्र और खतरनाक हैं।जिसके बाद केंद्र सरकार ने राज्यों को चिट्टी लिखकर कहा है कि इन 23 खतरनाक कुत्तों की मिक्स और क्रॉस ब्रीड बंद कर दी जाए। साथ ही नगर निगम लाइसेंस देना बंद कर दे। इसके अलावा इन कुत्तों की बिक्री पर रोक लगाई जाए।आगे बढ़ने से पहले नीचे दिए गए ग्राफिक से जानिए किस राज्य में सबसे ज्यादा कुत्ते के काटने के मामले आते हैं।सवाल- जिन लोगों के पास पहले से ये कुत्ते हैं, वह क्या करें?जवाब- केंद्र सरकार के द्वारा जारी चिट्ठी में कहा गया है कि जो लोग इन प्रतिबंध के लिए विचारणीय 23 नस्ल के विदेशी कुत्ते पहले से पाल रहे हैं उनके प्रजनन को रोकने के लिए ऐसे कुत्तों की नसबंदी करानी होगी।केंद्र सरकार ने राज्यों से पशु क्रूरता निवारण डॉग प्रजनन और विपणन नियम 2017 और पशु क्रूरता निवारण पालतू जानवर की दुकान नियम 2018 का सख्ती से पालन करने को कहा है। इससे कुत्तों के हमले के मामले तेजी से कम किए जा सकते हैं।वेटेरिनरी कंसल्टेंट डॉ. आदेश कुमार वर्मा बतातें हैं कि रॉटविलर, पिटबुल टैरियर, अमेरिकन बुलडॉग जैसे खतरनाक कुत्ते भारतीय जलवायु के हिसाब से नहीं होते हैं। उन्हें सर्दी के मौसम में रहने की आदत होती है। ऐसे में भारत की गर्मी सहन करने में उन्हें परेशानी होती है।मन मुताबिक जलवायु न मिलने की वजह से इनके व्यवहार में बदलाव आता है। यह चिड़चिड़े और अधिक एग्रेसिव हो जाते हैं। पिटबुल को प्रतिदिन कम से कम 30-60 मिनट तक टहलाना चाहिए। इसी तरह बाकी कुत्तों का भी एक नेचर होता है। लेकिन ज्यादातर कुत्तों के मालिकों को इसकी जानकारी नहीं होती। वह इन कुत्तों के व्यवहार को समझ नहीं पाते हैं। बस उन्हें कुत्ते पालने से मतलब होता है। जबकि ऐसी नस्ल के कुत्तों को पालने के लिए उनके मालिक को प्रशिक्षण देना चाहिए।स्ट्रीट डॉग रोटी, सब्जी या अन्य खाने पीने की चीजों के साथ सरवाइव कर सकते हैं। वहीं रॉटविलर, पिटबुल टैरियर जैसे बड़े विदेशी डॉग्स के लिए बहुत मुश्किल होती है। क्योंकि यह जंगली प्रजाति के कुत्ते होते हैं। यही वजह है कि इस तरह के कुत्ते और अधिक एग्रेसिव हो जाते हैं।भारतीय संविधान के मुताबिक नागरिकों के लिए पालतू जानवर रखना मौलिक अधिकार है। लेकिन अगर आप कोई कुत्ता पालते हैं तो सबसे पहले नगर निगम में उसका रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है। यह नियम सभी पालतू जानवरों पर लागू होता है। इस रजिस्ट्रेशन के लिए एक फीस भी देनी होती है। ध्यान रहे रजिस्ट्रेशन से पहले आपके कुत्ते को रेबीज का वैक्सीन लगा होना चाहिए। उसके बाद ही रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। इस रजिस्ट्रेशन को एक समय अवधि के बाद रिन्यू कराना पड़ता है। इसका समय नगर निगम अपने हिसाब से तय करता है। कई राज्यों में तो कुत्ते के पालने से पहले अपने पड़ोसी से NOC यानी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लिखित में लेने का नियम है। अगर पड़ोसी NOC न दे तो आप कुत्ता नहीं पाल सकते हैं।कोई पालतू कुत्ता अगर किसी व्यक्ति को काट ले तो IPC की धारा 337 के तहत कुत्ते के मालिक पर कार्रवाई हो सकती है। इसमें मालिक को 6 महीने तक की सजा का प्रावधान है। अगर पालतू कुत्ते के काटने की वजह से किसी की मौत हो जाए तो मालिक पर IPC की धारा 304 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। जिसमें 10 साल तक की सजा हो सकती है।वहीं, अगर किसी ने गैर इरादतन किसी पालतू पशु को मार डाला या उसकी मौत का कारण बना तो ऐसे मामलों में धारा 304 के तहत कार्रवाई की जाती है। यानी उसे दो साल तक की कैद या जुर्माना या फिर दोनों से दंडित किया जा सकता है।
