अरमान रज़ा सरगुज़ा
अम्बिकापुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा कल शाम 5 % डी ए के घोषणा के साथ ही कर्मचारियों में मायूसी छा गई है। एक ओर केंद्र सहित कई अन्य राज्यों में 34 % डी ए दिया जा रहा है वही छत्तीसगढ़ में आंशिक बढोत्तरी करते हुए 5 % की घोषणा की गई है वह भी मई माह से।
कि दूसरे राज्यों में काफी पहले से ही 34% दिया जा रहा है और छत्तीसगढ़ राज्य के बिजली विभाग के कर्मचारियों के लिए भी 34 % डी ए की घोषणा की है।छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष मनोज वर्मा सहित जिला पदाधिकारी अमित सिंह, प्रदीप राय ,काजेश घोष , अरविंद सिंह , अनिल तिग्गा , राजेश गुप्ता , प्रदीप राय ,लव गुप्ता , रामबिहारी गुप्ता,संजय चौबे , सुरित राजवाड़े, रोहिताश शर्मा ,प्रशांत चतुर्वेदी , विक्रम श्रीवास्तव,नाजिम खान ,संजय अम्बष्ट,अरविंद राठौड़ , लखन राजवाड़े, राकेश पांडेय, अमित सोनी, रणबीर सिंह चौहान, जवाहर खलखो, शुशील मिश्रा, रमेश यागिक ने कहा है कि प्रदेश के कर्मचारी अपने लंबित 17 % महंगाई भत्ता की आस लगाए हुए थे, जब तक महंगाई भत्ता की घोषणा नही हुई थी, कर्मचारी इंतजार कर ही रहे थे किंतु 5 % महंगाई भत्ता की घोषणा से छत्तीसगढ़ के कर्मचारी निराश हुए है। कर्मचारियो ने 17 % लंबित महंगाई भत्ता के लिए लगातार स्वागत, सम्मान व आंदोलन, हड़ताल किया परन्तु अब 5 % महंगाई भत्ता की घोषणा को दुर्भाग्यजनक घोषणा बताया है और कहा है कि इस 5 % DA की घोषणा से कर्मचारियो में आक्रोश है।छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष मनोज वर्मा ने कहा है कि -जनवरी 2020 से 4 % जुलाई 2020 से 3 % जनवरी 2021 से 4% जुलाई 2021 से 3 % जनवरी 2022 से 3 %
कुल 17 % महंगाई भत्ता लंबित था
मुख्यमंत्री के द्वारा 5% मंहगाई भत्ता किस आधार पर दिया गया है यह समझ से परे है, 5 % DA की घोषणा आधारहीन है,,विदित हो कि जनवरी 2020 से 4% एवं जुलाई 2020 से 3% महंगाई भत्ता लंबित है,, दो किश्त मिलाकर महंगाई भत्ता भी देते तो 7% होता। ऐसे में कर्मचारियों के साथ यह सबसे बड़ा कुठाराघात है। जिसका छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन विरोध करता है,,साथ ही कर्मचारी हितैसी सभी संगठनों को भी विरोध करना चाहिए।
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष मनोज वर्मा ने 5 % DA की घोषणा को कर्मचारियो के साथ अन्याय बताते हुए कहा है कि लंबित 17 % महंगाई भत्ता के एवज में 5 % की घोषणा कर्मचारियो के साथ नाइंसाफी है, आखिर कर्मचारियो के लंबित 17 % महंगाई की घोषणा कर न्याय क्यो नही किया गया, कर्मचारी 5 किश्त की भत्ते का ढाई वर्षो से इंतजार कर रहे है, कोरोना काल मे जान को जोख़िम में डालकर सेवाएं दिए है, लंबित 5 किश्त (17%) से कर्मचारियो को 2 से 3 लाख रुपये का कम वेतन मिला है, अब महंगाई भत्ता के बिना महंगाई से जूझना कर्मचारियो के दुष्कर हो गया है, इस दौर में जब केंद्र व अन्य राज्य में 34 % भत्ता देय है, छत्तीसगढ़ में भी लंबित 17% महंगाई भत्ता की घोषणा कर कर्मचारियो के साथ न्याय किया जाना था।