*जो स्वाद फल में होता हैं वह वृक्ष में नहीं कलयुग की बहुत बड़ी विशेषता है इसमे मानसिक पुण्य तो होता है पर मानसिक पाप नहीं। रामचरितमानस में लिखा हैं- *मानस पुण्य होहिं नहीं पापा ।* इसलिए अच्छा विचार ही रखें यह बातें अवधपुरी धाम से पधारें हुए अनंत विभूषित स्वामी रत्नेश प्रपन्नाचार्य महाराज भागवत महापुराण कथा सुनाते हुए शिवरीनारायण मठ महोत्सव में अभिव्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि कलयुग में पुत्र अपने माता पिता को तभी तक मानते हैं जब तक लुगाई न आ जाए। कलयुग अधर्म का मित्र है जो अधर्म के पथ पर चलते हैं थोड़े समय तक फलते फूलते दिखते हैंं । इसकी विशेषता यह भी है कि लोग अपने उदर पोषण में ही लगे रहते हैं।

इतना कमाई करना चाहते हैं कि उनकी 21 पीढ़ियों को पोषण प्राप्त हो जाए इसे ही विद्या मान लेते हैं किंतु यह विद्या नहीं है। विद्या तो वह हैं जिससे ज्ञान मिले सुत,दारा,संपदा पापी के भी होए। हमारे जीवन का मूल लक्ष्य हैं भगवत भक्ति की प्राप्ति। जीवन में किसी प्रश्न का उत्तर जानना हो तो उत्तर दिशा की ओर जाना । दक्षिण,पश्चिम,पूर्व में जाने से इसका समाधान नहीं होगा ।
जो स्वाद फल में प्राप्त होता है वह वृक्ष में नहीं। आम फल मीठा होता है लेकिन उसके वृक्ष की जड़ चबाने से वह स्वाद नहीं मिलेग । शर्करा की उत्पत्ति गन्ने से होती है किंतु गन्ने से खीर नहीं बनाई जा सकती! ठीक ऐसे ही भागवत की उत्पत्ति वेदों से हुई है लेकिन जो कार्य भागवत कर सकते हैं वह कार्य वेद नहीं बिना भगवत कृपा सत्संग की प्राप्ति हो ही नहीं सकती*” राम कृपा बिनु सुलभ न सोई ।”*
कथा सुनने के लिए कभी भी अकेले नहीं जाना चाहिए यह बहुत बड़ी विडंबना हैं कि हम लोग जब पिक्चर देखने जाते हैं या पिकनिक पर तब अपने इष्ट मित्र परिवार को लेकर जाते हैं लेकिन जब कथा सुनने जाते हैं तब अकेले चल देते हैं।कथा सुनने का सबसे बड़ा लाभ है कि इससे मोक्ष मुट्ठी में और चित्त में हरि आ जाते हैं । यदि कोई मनुष्य जन्म पाकर भागवत कथा नहीं सुनी तो वह जीते जी मुर्दे समान हैं ।
उन्होंने कहा कि हमें भागवत की कथा उससे सुननी चाहिए जो वैष्णव,विप्र,शास्त्र ज्ञानी हो,दृष्टांत देने में समर्थ हो लोभी,पाखंडी,पथभ्रष्ट लोगों से कथा नहीं सुननी चाहिए । संपूर्ण जगत परमात्मा से उत्पन्न हुआ और परमात्मा में ही समाहित हो जाता हैं दुनिया बनाने परमात्मा को किसी के सहायता की आवश्यकता नहीं होती। कोई सलाहकार इंजीनियर उन्होंने नहीं रखा-“संग सहाय न दूजा” वह स्वयं निर्माण कर्ता है। ईश्वर की सत्ता ही जगत की सत्ता है ईश्वर नहीं तो यह जगत भी नहीं होता। मंच पर मुख्य यजमान रूप में छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग अध्यक्ष डा राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास,सर्वेश्वर दास गौ सेवा आयोग पूर्व अध्यक्ष परमात्मा नंद दास विराजित थें ।*
छत्तीसगढ़ कृषक कल्याण परिषद अध्यक्ष आमंत्रण पर पहुंचें* कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त छत्तीसगढ़ कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा,जांजगीर-चांपा जिलाधीश तारण प्रकाश सिन्हा, द्वितीय दिवस कथा श्रवण निमित्त उपस्थित हुए! कथा श्रवण कर्ताओं में जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह,जिला पंचायत उपाध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह,शेषराज हरबंस,इंजीनियर रवि पांडे सनत राठौर,विजय पाली,बृजेश केसरवानी,ब्लॉक कांग्रेस कमेटी पामगढ़ अध्यक्ष नवल सिंह,सुखराम दास,जांजगीर नपा अध्यक्ष भगवानदास गढ़ेवाल,नवागढ़ जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रीति देवी सिंह,सुबोध शुक्ला,वीरेंद्र तिवारी, पूर्णेन्द तिवारी,दिलीप तिवारी,निरंजन लाल अग्रवाल,कमलेश सिंह,प्रमोद सिंह,पवन सुल्तानिया,ऋषि उपाध्याय,शशिभूषण सोनी,देवा लाल सोनी,गोपाल अग्रवाल ,मीडिया प्रभारी निर्मल दास वैष्णव के नाम उल्लेखनीय हैं।