मध्य प्रदेश:- राजधानी भोपाल से दिल्ली जाने वालों के लिए सफर बहुत ही आसान होने जा रहा है. भोपाल-ग्वालियर के बीच बन रहे चार लेन ग्रीनफील्ड हाईवे से प्रदेश के कई इलाकों को बड़ा फायदा होने जा रहा है. मध्य प्रदेश सरकार और मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम यानी MPRDC की तरफ से तैयार किया जा रहा है. गांव-कस्बों से होकर निकलने वाला यह नया हाईवे भोपाल से ग्वालियर की कनेक्टिविटी बेहतर हो जाएगी. इन दोनों शहरों के बीच की दूरी लगभग 425 किलोमीटर है, लेकिन यह ग्रीनफील्ड हाईवे बनने से दूरी लगभग 80 किमी घट सकती है. इन दोनों के बीच के सफर में लगने वाला समय भी 7 से घटकर 5 घंटे रह जाएगा.
इस ग्रीनफील्ड हाईवे से भोपाल और ग्वालियर के बीच रहने वाले लोगों को फायदा तो मिलेगा ही, लेकिन इन इलाकों के कई शहर भी इससे कनेक्ट हो जाएंगे. वहीं प्रस्तावित रूट से ब्यावरा, गुना, शिवपुरी और ग्वालियर की बेहतर कनेक्टिविटी होगी. आगे यही हाईवे मुरैना, आगरा और मथुरा होते हुए दिल्ली तक का सफर पूरा करेगा. आने वाले समय में इसे उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना भी बनाई जा रही है. इससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच आने-जाने वालों को भी काफी सहूलियत मिलेगी. इस इलाके के छोटे-छोटे गांव-देहात के लोगों की भी बड़े शहरों से कनेक्टिविटी बढ़ेगी. आने वाले समय में इस कॉरिडोर को भोपाल-ग्वालियर-नागपुर हाईस्पीड कॉरिडोर का हिस्सा बनाने की योजना है.
दोनों शहरों के बीच समय बचेगा
वहीं भोपाल से दिल्ली जाने वाले लोगों के लिए इससे बड़ा फायदा होने के साथ-साथ समय की भी काफी बचत होगी. हालांक, अभी भोपाल से दिल्ली तक जाने में लगभग 14 से 16 घंटे लग जाते हैं. जब ये नया हाईवे तैयार हो जाएगा, तो यही सफर 8 से 9 घंटे में पूरा तय हो जाएगा. इतना ही नहीं इन दोनों शहरों के बीच की दूरी भी लगभग 100 किमी तक घट सकती है. वहीं ग्वालियर की तरफ यह हाईवे आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेस-वे से जुड़ जाएगा. आगे चलकर ग्वालियर-आगरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे से कनेक्ट होने पर दोनों शहरों के बीच सफर का समय भी घट जाएगा यानी 1 घंटे के अंदर पूरा हो सकता है. आगरा पहुंचने के बाद यमुना एक्सप्रेस-वे के रास्ते दिल्ली की कनेक्टिविटी भी काफी मजबूत हो जाएगी.
एक्सप्रेस-वे से होगा काफी लाभ
इतना ही नहीं भोपाल-ग्वालियर के बीच बनने वाला यह एक्सप्रेस-वे सिर्फ आने-जाने की सुविधा नहीं बढ़ाएगा, बल्कि कारोबार और माल ढुलाई के लिए भी अहम माना जा रहा है. पुराने हाईवे पर ट्रैफिक भी लगातार बढ़ रहा है. कई जगह सड़क संकरी होने से वाहन चालकों को परेशानी होती है. इसके चलते हादसे का खतरा भी बना रहता है. ऐसे में नए रास्ते की जरूरत महसूस की गई. ग्रीनफील्ड हाईवे का मतलब है कि इसे पुरानी सड़क को चौड़ा करके नहीं, बल्कि नए रूट पर खेतों और खुले इलाकों से होकर बनाया जाएगा. इससे भारी वाहनों और दूसरे ट्रैफिक को तेज रास्ता मिलेगा. सामान की ढुलाई में समय बचेगा और एमपी के उत्तर-मध्य हिस्से में कारोबार को रफ्तार मिल सकती है.
2030 तक पूरा करने का लक्ष्य
मिली जानकारी के मुताबिक, भोपाल-ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को 2029 से 2030 के बीच पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. मध्य प्रदेश की तरफ से इस प्रोजेक्ट पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है. वहीं इसकी प्रक्रिया MPRDC की तरफ से शुरू कर दी गई है. जमीन से जुड़े काम यानी भूमि अधिग्रहण में भी तेजी लाने की कोशिश की जा रही है. माना जा रहा है कि आने वाले कुछ महीनों में प्रोजेक्ट से जुड़े काम जल्द पूरे किए जा सकते हैं. इसके बाद निर्माण को रफ्तार मिलने की उम्मीद है. एक्सप्रेसवे तैयार होने पर भोपाल से ग्वालियर, आगरा और दिल्ली का रास्ता आसान होगा. साथ ही व्यापार, माल परिवहन और स्थानीय लोगों की आवाजाही को भी फायदा मिलेगा. कुल मिलाकर यह सड़क एमपी की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार दे सकती है.
