रायपुर। पूरे देशभर में आज होलिका दहन का पर्व मनाया जाएगा। रंग खेलने से एक रात पहले ही होलिका जलाई जाती हैं। लेकिन शायद आप नहीं जानते होंगे कि इस राख के भी कई फायदे हैं। ऐसा माना जा तह हैं कि जिस प्रकार दीपावली में दीपों की उष्णता व तैल की गंध से चातुर्मास्य के संचित कीटाणुओं का नाश होता है, उसी प्रकार शीतकाल में संचित कीटाणुओं का नाश होलिका जलने से उत्पन्न गहरे अग्निताप व अबीर-गुलाल आदि की गंध से होता है। गाना, हॅसना और तेज आवज में बोलने से गले का व्यायाम होता है एंव गुलाल-अबीर आदि का गले में जाना फेफड़ों व गलें में अवरूद्ध कफ की निवृत्ति में उपयोगी
होली जलने के अगले दिन सुबह सुबह होलिका की राख (सात चुटकी भरके) घर ले आएं। अब इस राख को तांबे के सात छेद वाले सिक्के के साथ एक लाल कपड़े में बांध लें और तिजोरी में रख दें। इससे घर में पैसा बढ़ेगा। अगर इस कपड़े को अपनी दुकान के मुख्य द्वार पर लटकाएंगे तो दुकान और व्यापार की उन्नति होगी।
होलिका की राख के अचूक उपाय
1-यदि कोई व्यक्ति निरन्तर बीमार रहता है, और काफी दवा कराने के बावजूद भी रोग में कोई लाभ नहीं हो रहा है, तो होली दहन के समय देशी घी में दो लौंग, एक बताशा, एक पान का पत्ता इन सभी वस्तुओं को होली जलने वाली आग में डाल दें। अगले दिन होली की राख रोगी के शरीर में लगायें और तत्पश्चात गर्म जल से स्नान करायें। इस उपाय से रोगी शीघ्र ही स्वस्थ्य होने लगेगा।
2-कोई व्यक्ति अभिचार कर्म के कारण अर्थात मारण, विद्वेषण, उच्चाटन, सम्मोहन व वशीकरण से अक्रान्त हो तो वह व्यक्ति उपरोक्त विधि से होलिका की राख शरीर में लगाकर गर्म जल से स्नान कराने से नकारात्मक प्रभाव निर्मूल हो जाता है।