गोरखपुर:- गोरखपुर नगर निगम के वरिष्ठ लिपिक देवानंद तिवारी, कनिष्ठ लिपिक मोहम्मद रिजवान और नायब मोर्हिरर ज्ञान पाण्डेय को निलंबित कर दिया गया है। इन कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने दो फर्मों को ठेके पर मिले काम की फाइल गायब कर दी। महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव ने इन फर्मों की फाइल मांगे जाने और जांच के आदेश दिए थे लेकिन चार रिमाइंडर के बाद भी निगम अधिकारी इन कर्मचारियों से फाइल हासिल नहीं कर पाए। नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल के निर्देश के बाद अपर नगर आयुक्त निरंकार सिंह ने तीनों कर्मचारियों को निलंबित किया। साल 2007 में मेसर्स सेलवेल मीडिया सर्विस प्राइवेट लिमिटेड एवं मेसर्स सेपर्स इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड ने गेंट्री गेट, बस यात्री शेल्टर और यूनिपोल का आवंटन कराया था।
बदले में इन्हें कुछ कूड़ाघर का निर्माण, सौदर्यीकरण के काम करने थे। गेंट्री गेट एवं बस यात्री शेल्टर एवं यूनिपोल का आवंटन सिर्फ 15 साल के लिए किया गया था। बदले में सालाना 1875 रुपये प्रति गेंट्री गेट, बस यात्री शेल्टर एवं यूनिपोल निगम में जमा करना था। हर साल 10 फीसदी की सालाना शुल्क में बढ़ोत्तरी की शर्त थी। महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव द्वारा की गई शिकायत के मुताबिक इन लोगों ने निगम कर्मचारियों से मिलीभगत कर कोई शुल्क नहीं जमा किया। हेराफेरी कर आवंटन की अवधि भी 15 साल से बढ़ा कर 30 साल कर ली।
ये नियमावली लागू फिर भी जारी रहे पुराने आवंटन कर्मचारियों के निलंबन में यह भी खुलासा हुआ कि फरवरी 2021 में नगर निगम ने नई विज्ञापन नियमावली लागू की। नियमावली में स्पष्ट प्रावधान था कि लागू होने की तिथि के पूर्व के सभी विज्ञापन संबंधी आवंटन मसलन गेंट्री गेट, यूनिपोल, बस यात्री शेल्टर रद्द किए जाते हैं।
जानकारी के मुताबिक मेसर्स सेलवेल मीडिया सर्विस प्राइवेट लिमिटेड को 11 गेंट्री गेट, 23 बस यात्री शेल्टर और 15 यूनिपोल मिले थे। इनके बदले में सालाना शुल्क के साथ कूड़ाघर एवं सौदर्यीकरण का काम करना था। मेसर्स सेपर्स इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड 6 गेट्रीगेट मिले थे। आरोप है कि कर्मचारियों से मिलीभगत कर इन दोनों फर्मों ने नगर निगम को करीब तीन से चार करोड़ की आर्थिक क्षति पहुंचाई। हालांकि दोनों फर्मों का पक्ष सामने नहीं आया है, उनका पक्ष मिलेगा तो उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
