× (नई दिल्ली)। भारत में बहुत से लोग टैक्स चोरी के तमाम रास्ते निकाल लेते हैं, जिसका नतीजा ये होता है कि उनके पास कालाधन जमा हो जाता है। पिछले कई सालों से सरकार टैक्स चोरी को रोकने की कोशिश कर रही है। यहां तक कि आयकर विभाग के पास तो उन पैसों को ट्रैक करने का प्रावधान भी है, जिसके बारे में आप समझा नहीं सकते हैं यानी अनएक्सप्लेंड कैश
आयकर 5 कैटेगरी की आय पर लगता है- सैलरी, हाउस प्रॉपर्टी, बिजनेस से आय, कैपिटल गेन और अन्य स्रोत से हुई आय। टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ आयकर अधिनियम के तहत कार्रवाई भी की जाती है।आयकर नियमों के मुताबिक टैक्सपेयर के खाते में आए किसी भी तरह के पैसे पर टैक्स लगना तय है, अगर उस पर छूट ना मिली हो तो। अगर टैक्सपेयर ने ऐसे किसी पैसे पर टैक्स नहीं दिया है तो उसे पैसे मिलने का स्रोत बताना होगा और ये भी बताना होगा कि उसने उस पैसे पर टैक्स क्यों नहीं दिया।
आय के स्रोत का पता होना जरूरी है, वरना ऐसे पैसे आप पर भारी टैक्स का बोझ डाल सकते हैं।सोना, ज्वैलरी या अन्य कीमती चीजों के संदर्भ में ये ध्यान रखेंआयकर अधिनियम की धारा 69ए के तहत अगर किसी शख्स के पास कोई पैसा, सोना, ज्वैलरी या अन्य कोई कीमती चीज पाई जाती है, जिसका खाते में जिक्र नहीं है और ना ही टैक्सपेयर ने उसके स्रोत को लेकर कोई जानकारी दी है या टैक्सपेयर द्वारा दी गई जानकारी से असेसिंग ऑफिसर संतुष्ट नहीं है तो यह उस शख्स की उस साल की आय मानी जाएगी। तो लगेगा 83.25 फीसदी का भारी-भरकम टैक्सआयकर नियमों के मुताबिक, जिन पैसों पर आयकर विभाग को जानकारी नहीं दी जाती है, उस पर 83.25 फीसदी तक टैक्स चुकाना पड़ता है।
इसमें 60 फीसदी टैक्स, 25 फीसदी सरचार्ज और 6 फीसदी की पेनाल्टी शामिल होती है। यानी ऐसे पैसों पर टैक्स लेते वक्त ये नहीं देखा जाता कि वह किस टैक्स स्लैब में आ रही है, बल्कि उस पर सीधे 60 फीसदी का टैक्स लगा दिया जाता है।
जिन पैसों की जानकारी नहीं दी जाती है, उन पर किसी तरह का डिडक्शन नहीं दिया जाता है, ना ही किसी तरह के नुकसान को सेट ऑफ करने की इजाजत होती है। हालांकि, इस पर 6 फीसदी की पेनाल्टी नहीं लगाई जाती है, अगर उसे टैक्स रिटर्न में शामिल किया गया हो और उस पर टैक्स दिया गया हो।
