नई दिल्ली: पूर्वी लद्दाख में लंबे समय से जारी सैन्य गतिरोध के बीच शनिवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि चीन को सीमा प्रबंधन समझौतों का पालन करना चाहिए और भारत-चीन संबंधों में सुधार के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति का माहौल होना चाहिए। एक ‘थिंकटैंक’ के संवाद सत्र में जयशंकर ने कहा कि मोदी सरकार सीमा पर बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है और अंततः भारत और चीन के बीच संबंधों में संतुलन होना चाहिए।
समझौता का पालन होना चाहिएजयशंकर ने चीन से निपटने को लेकर एक व्यापक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि भारत ने अतीत में अंतरराष्ट्रीय संबंधों का उतना प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं किया, जितना वह कर सकता था। विदेश मंत्री ने चीन से उत्पन्न चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्रों समेत विभिन्न क्षेत्रों में एक मजबूत देश बनने की भारत की आवश्यकता को रेखांकित किया। जयशंकर ने कहा कि एक संतुलन होना चाहिए और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति होनी चाहिए, जो समझौते हुए हैं उनका पालन करना होगा।
चीन से कराची जाने वाली शिप में थे न्यूक्लियर मिसाइल से जुड़े कंसाइनमेंट, एजेंसियों ने मुंबई पोर्ट पर रोकाचीन को हम कहां दे रहे टक्करमोदी सरकार ने पिछले 10 वर्षों में सीमा के बुनियादी ढांचे को काफी बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों, सुरंगों और पुलों के निर्माण में तेजी से हो रहा है। विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि भारत अब प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में चीन को टक्कर दे रहा है और इसका उदाहरण उन्होंने 5जी दूरसंचार सेवाओं के विकास के रूप में दिया। उन्होंने आगे कहा कि हमने 4जी के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं की, हमने 3जी के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं की, हमने 2जी के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं की लेकिन अब हमने 5G पर प्रतिस्पर्धा करने का फैसला किया। जब आपने 5G पर प्रतिस्पर्धा करने का फैसला किया और हम करके दिखा रहे हैं।
