विदेशी निवेशकों ने स्मॉल और मिड कैप कंपनियों का रुख किया है. विदेशी निवेशकों ने स्मॉल और मिड कैप कंपनियों का रुख किया है.
विदेशी निवेशकों की 10 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी वाली कंपनियों की संख्या बढ़ी है.ऐसी कंपनियों की संख्या एक साल में 257 से बढ़कर 275 पहुंच गई है.मिड और स्मॉल कैप स्टॉक ने बीते एक साल में 60 फीसदी का रिटर्न दिया है.नई दिल्ली. शेयर बाजार (Stock Market) में आप भी निवेश करते हैं तो यह खबर बहुत काम की है. भारतीय स्टॉक मार्केट में पहली बार कुछ ऐसा हो रहा है, जो आजतक नहीं देखने को मिला. इस बार विदेशी निवेशक ऐसा रास्ता बना रहे हैं, जो पूरे बाजार का रुख बदल सकता है. उनका मकसद भारतीय बाजार से मोटा रिटर्न कमाने के साथ स्थिरता पर दिख रहा है. इसका फायदा खुदरा और छोटे निवेशकों को भी मिलेगा.
दरअसल, पहली बार विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार की मिड और स्मॉल कैप कंपनियों पर ज्यादा दांव लगाना शुरू किया है. अभी तक उनका जोर कम जोखिम और स्थिर रिटर्न वाली लार्ज कैप कंपनियों पर था, लेकिन अब विदेशी निवेशक छोटी और मझोली कंपनियों पर ज्यादा दांव लगा रहे. इसका मकसद ये है कि छोटी-मझोली कंपनियों में ग्रो करने की ज्यादा क्षमता है और इनके बढ़ने से पूरे शेयर बाजार का विकास होगा, क्योंकि ऐसी कंपनियों की संख्या भी ज्यादा है
ब्लूमबर्ग एनालिसिस रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी निवेशकों की 10 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी वाली कंपनियों की संख्या एक साल में 257 से बढ़कर 275 पहुंच गई है. इसमें से ज्यादातर बढ़ोतरी छोटी और मझोली कंपनियों में की गई है. विदेशी निवेशक दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले शेयर बाजार में नई संभावनाएं तलाश रहे हैं, जो उनके पैसे को तेजी से बढ़ा सकें.छोटी कंपनियों ने भर दी झोलीविदेशी निवेशकों ने ऐसे ही नहीं झोली-मझोली कंपनियों का रुख किया है.
बीते एक साल के रिटर्न के आंकड़े देखकर आपको भी समझ आ जाएगा कि उनकी रणनीति में यह बदलाव क्यों हो रहा है. दरअसल, मिड और स्मॉल कैप स्टॉक ने बीते एक साल में 60 फीसदी का रिटर्न दिया है, जबकि इसी दौरान एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स ने 23 फीसदी का रिटर्न अपने निवेशकों को दिया.ये भी पढ़ें – सैलरी में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने को तैयार कंपनियां, नई रिपोर्ट में हुआ खुलासा, इन क्षेत्रों में होगा सबसे ज्यादा इंक्रीमेंटक्या देखकर चुनते हैं सही कंपनीविदेशी निवेशकों ने छोटी और मझोली कंपनियों को चुनने के लिए कुछ मानक बनाए हैं.
इसमें फंडामेंटल्स पर खास जोर दिया जाता है. इन कंपनियों की कमाई बीती तिमाही में करीब 29 फीसदी बढ़ी है, जाहिर है कि इनमें आगे बढ़ने की क्षमता काफी ज्यादा है. मार्केट एनालिस्ट का कहना है कि अगर आप भारत में बेस्ट ईवी कंपनी या न्यू ऐज टेक्नोलॉजी कंपनी खोज रहे तो आपको लार्ज कैप में नहीं मिलेगी, बल्कि छोटी और मझोली कंपनियों का रुख करना पड़ेगा.
बेहतर रिटर्न देने वाली कंपनियों की पहचान करने के लिए विदेशी निवेशक अच्छी लिक्विडिटी और कंपनी के हालिया प्रदर्शन को ज्यादा तवज्जो देते हैं. आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अनुसार, बीते एक साल में मिड कैप कंपनियों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 14 फीसदी से बढ़कर 17 फीसदी पहुंच चुकी है. वहीं, छोटी कंपनियों में 8 फीसदी से बढ़कर 9 फीसदी हो गई है. इस तरह, कुल निवेश की बात करें तो लार्ज कैप के बजाए स्मॉल और मिड कैप में ज्यादा आ रहा है.
