नई दिल्ली :- नवरात्र में राम जन्मभूमि मंदिर में 9 दिन शक्ति की उपासना की जाएगी। नवमी तिथि को बालक राम को 56 प्रकार के व्यंजन का भोग लगाया जाएगा। इस बार राम नवमी पर रामलला का सूर्याभिषेक किया जाए। राम नवमी पर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में सूर्य की किरणें रामलला के मस्तक पर पड़ेंगी, जिससे बालक राम का सूर्य तिलक भी होगा।
नवरात्र के पहले दिन से रामनवमी तक बालक राम विशेष प्रकार के वस्त्र धारण करेंगे। प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली बार प्रभु के वस्त्रों की शैली को बदला गया है। मयूर व अन्य वैष्णव चिन्हों को रंग-बिरंगे रेशम के साथ-साथ असली तारों से काढ़ा गया है। भगवान राम के वस्त्र खादी कॉटन से निर्मित हैं और वस्त्रों पर असली चांदी एवं सोने की हस्त-छपाई की गई है। छपाई में प्रयोग किए हुए सभी चिन्ह वैष्णव पद्धति के हैं।
चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ के साथ ही रामलला के भव्य व दिव्य जन्मोत्सव की तैयारी के लिए विविध अनुष्ठान शुरू हो गए हैं। राम जन्मभूमि मंदिर में 9 दिन शक्ति की उपासना की जाएगी। चांदी की चौकी पर कलश स्थापना के साथ नौ दिनों तक बालक राम के साथ मां दुर्गा की भी पूजा होगी। नौ दिन तक दुर्गा सप्तशती पाठ और हवन कुंड में आहूति दी जाएगी। नवमी तिथि को बालक राम को 56 प्रकार के व्यंजन का भोग लगाया जाएगा। इसके साथ नौ दिन तक रामचरितमानस का पाठ भी चलेगा। पूरे नवरात्र भर मंदिर को फूलों से विशेष रूप से सजाया जाएगा। वहीं रात में बालक राम का मंदिर लाइटों से जगमगाएगा। इसके अलावा मंदिर में खूबसूरत रंगोलियां भी बनाई जाएंगी।
मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि तैयारी पूरी चल रही है। रामनवमी पर चार मिनट तक रामलला का सूर्य तिलक होगा। इसके लिए राममंदिर में उपकरण लगाए जा रहे हैं। बताया कि दिन में 12 बजे ऑप्टोमैकेनिकल सिस्टम से सूर्य की किरणें प्रभु रामलला के ललाट पर डाली जाएगीं। मंदिर के भूतल पर दो दर्पण और एक लेंस लगाया जा चुका है। सूर्य की रोशनी दूसरे तल पर लगे तीन लेंस और 2 दर्पणों से होते हुए भूतल पर लगाए गए आखिरी दर्पण पर पड़ेगी। इससे परावर्तित होने वाली किरणों से मस्तक पर तिलक बनेगा। यह सूर्य अभिषेक 75 मिमी. का होगा
