नई दिल्ली:– पुणे में यह जीका का वायरस गर्भवती महिला को भी संक्रमित कर चुका है. 6 महीने की गर्भवती महिला का सैंपल जांच के लिए भेजा गया था. जिसके बाद इसकी पुष्टि हुई है, हालांकि महिला में इस वायरस के कोई गंभीर लक्षण नहीं हैं, लेकिन फिर भी निगरानी में रखकर उसका इलाज किया जा रहा है. इस बीच यह जानना जरूरी है कि जीका वायरस कैसे फैलता है और क्या ये गर्भवती महिला से उसके बच्चे में भी फैल सकता है?
डॉक्टर बताते हैं कि जीका वायरस भी एक मच्छर जनित बीमारी है. यह भी डेंगू की तरह ही मच्छर के काटने से होती है, लेकिन जीका के मामले में खतरे की बात यह है कि ये एक से दूसरे व्यक्ति को भी संक्रमित कर सकती है. जिस इलाके में इसका एक केस आता है वहां संक्रमित व्यक्ति से इसके दूसरे में फैलने का भी खतरा रहता है. अगर समय पर इलाज न हो तो यह खतरनाक साबित हो सकता है.
गर्भवती महिला में कैसे हुआ संक्रमण?
जीटीबी हॉस्पिटल में सीनियर रेजिडेंट डॉ. अंकित कुमार बताते हैं कि जीका वायरस का संक्रमण एक से दूसरे इंसान में हो सकता है. ऐसे में हो सकता है कि गर्भवती महिला किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आ गई हो. चूंकि पूणे में इससे पहले भी जीका वायरस के चार मामले आ चुके हैं तो इससे आशंका है कि कुछ इलाकों में यह वायरस फैल चुका है. जिससे महिला को संक्रमण हुआ है.
जीका वायरस संक्रमित महिला से उसके बच्चे में भी जा सकता है, हालांकि अगर प्रेगनेंसी के दौरान निर्धारित प्रोटोकॉल के हिसाब से इलाज दिया जाए तो बच्चे में संक्रमण की आशंका को कम किया जा सकता है. इसके लिए जरूरी है कि महिला को डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाए और उसके अल्ट्रासाउंड करने बच्चे की पेट में गतिविधियों को पता लगाया जाए.
इस मामले में मां की देखभाल बहुत जरूरी है. ऐसा इसलिए क्योंकि अगर बच्चे के शरीर में जीका का वायरस चला गया तो वह उसकी हेल्थ को बिगाड़ सकता है. बच्चे को इससे दिमाग से संबंधित परेशानी हो सकती है.
जीका के लक्षण
बुखार
जोड़ों में दर्द
सिरदर्द
आंखों का लाल होना
कैसे करें बचाव
घर के आसपास पानी जमा न होने दें
पूरी बाजू़ के कपड़े पहने
संक्रमित मरीजों वाले इलाके में न जाएं
खानपान का ध्यान रखें
जो गर्भवती महिलाएं उस क्षेत्र में रहती हैं जहां जीका का वायरस है उनको विशेष रूप से सावधानी बरतने की जरूरत है. ऐसा महिलाएं संक्रमित इलाकों में रहने वाले किसी व्यक्ति के नजदीकी संपर्क में न आएं और अपनी स्वास्थ्य की नियमित रूप से जांच कराती रहें. चूंकि इस वायरस से बचाव की कोई वैक्सीन नहीं है. ऐसे में यह रोकथाम बहुत जरूरी है.
