नई दिल्ली:– हम जानते है कोरोना महामारी ने दुनियाभर में तहलका मचा दिया था वहीं पर 4 साल पहले की महामारी से अब तक हम उभरे नहीं है आज भी इस महामारी का दर्द किसी ना किसी रूप में वायरस के नए रूपों में आ ही जाता है। कोरोना महामारी के बाद अब आने वाले 5 से 6 सालों को लेकर यूएनईपी की रिपोर्ट सामने आई है जिसमें दावा किया गया है कि, नई उभरती हुई बीमारियां 2030 तक एक और महामारी को जन्म दे सकती हैं। जिसकी तबाही पूरी दुनिया में देखने के लिए मिलेगी। बता दें कि, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने 16 जुलाई 2024 को यह रिपोर्ट जारी की है।
जानिए क्या कहती है रिपोर्ट
आपको बताते चलें,संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने 16 जुलाई 2024 को जारी अपनी इस रिपोर्ट में कहा है कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण में लगातार हो रहे बदलावों ने प्रजातियों के आवास क्षेत्रों को प्रभावित किया है। इस वजह से प्रजातियों के बीच नए संपर्क पैदा होने से जानवरों से इंसानों में बीमारियों को फैलाने वाले जूनोटिक स्पिलओवर का खतरा बढ़ जाता है। इसकी वजह से महामारी फैलने का खतरा ज्यादा होता है। कहा जा रहा है कि,जानवरों, पक्षियों और दूसरे जीवों से इंसानों में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों को वैज्ञानिक रूप से जूनोसिस या फिर ‘जूनोटिक डिजीज’ बढ़ने का खतरा ज्यादा है जो नई उभरती हुई बीमारियों के खतरे को बढ़ा रही है।
2050 तक 12 गुणा ज्यादा होगी मौतें
इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है, जूनोटिक स्पिलओवर की घटनाएं सालाना पांच से आठ फीसदी बढ़ रही हैं। वहीं पर अनुमान यह भी कहते है कि, 2020 की तुलना में 2050 तक सबसे आम रोगजनकों के पनपने के कारण इंसानों में बीमारियों के खतरे से 12 गुणा ज्यादा मौतें दर्ज हो सकती है। रिपोर्ट में कोविड-19, इबोला, एच5एन1, मर्स, निपाह, सार्स और इन्फ्लूएंजा ए/एच1एन1 जैसे पिछले प्रकोपों पर संज्ञान लिया गया है, जिनके कारण बड़े पैमाने पर इंसानी जीवन और आर्थिक नुकसान हुआ है। इधर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 24 देशों में इंसानों में फैले एवियन इन्फ्लूएंजा के 891 मामलों की जानकारी दी है।
जानिए कैसे इंसानों को प्रभावित करती है बीमारियां
आपको बताते चलें, इंसानो में बीमारियां आसानी से प्रवेश कर जाती है जहां पर आमतौर पर यह बीमारियां तब फैलती हैं जब कोई वायरस अपने मेजबान (होस्ट) से अलग एक नया होस्ट खोजने में सक्षम हो जाता है। उदाहरण के लिए यदि कोई जानवर किसी खास वायरस से ग्रस्त है और वो किसी प्रकार इंसानों या दूसरे जानवरों के संपर्क में आता है तो वो उन्हें भी संक्रमित कर देता है। इस तरह यह बीमारियां एक से दूसरे के पास पहुंचती है। कहा तो यह भी जाता है कि, मनुष्यों में 60 फीसदी से अधिक संक्रामक रोग जूनोटिक बीमारियां है।
