नई दिल्ली :– बदलती जीवनशैली, खानपान, मोटापा, क्लोरीन युक्त पानी का सेवन सहित विभिन्न कारणों से लोगों का लिवर कम उम्र में ही खराब होने लगा है। लिवर शरीर का अहम अंग है। यह पाचन में अहम भूमिका निभाता है। शरीर में खून को फिल्टर करना, हार्मोन बनाने के साथ-साथ एनर्जी बढ़ाने का काम भी करता है। शराब का अत्याधिक सेवन व हेपेटाइटिस ए,बी व सी का संक्रमण लिवर पर सबसे बुरा असर डालता है।
उन्हाेंने बताया कि स्वस्थ जीवनशैली के लिए सेहत का ध्यान रखें। शरीर में होने वाले बदलाव हमें लिवर में समस्या का संकेत देते हैं। अनुवांशिक, गलत जीवनशैली व खानपान, एल्कोहल व तंबाकू का अधिक सेवन, अधिक कालेस्ट्राल वाला आहार व हेपेटाइटिस संक्रमण मुख्य रूप से जिम्मेदार होता है।
स्वस्थ रहने के लिए अच्छी नींद जरूरी है। नींद पूरी न होने पर मेटाबालिज्म पर असर होता है, जिससे कि लिवर से जुड़े रोगों का खतरा बढ़ता है। फैटी लिवर की समस्या आम हो गई है। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस बी और सी की जांच व उपचार की सुविधा है।
हेपेटाइटिस से कैंसर का भी खतरा
नोडल अधिकारी कपूर ने बताया कि हेपेटाइटिस ए,बी या सी के संक्रमण से लिवर की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
दूषित पेयजल, संक्रमित ब्लड, इंजेक्शन, लार या संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध आदि से हेपेटाइटिस होने का खतरा रहता है।
हेपेटाइटिस बी और सी के मामले लिवर कैंसर में बदल जाते हैं। यह दो प्रकार प्राइमरी व सेकंड्री होते हैं।
अलीगढ़ के स्लम एरिया में हेपेटाइटिस के सर्वाधिक मरीज निकल रहे हैं।
यहां दूसरा लिवर कैंसर भी सामान्य है। मुख्य रूप से लिवर कैंसर गॉल ब्लैडर से आ रहा है।
अंतिम चरण में पता चलता है। हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए नवजात को 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस बी वैक्सीनेशन जरूरी है।
