: : आज पूरा भारत कारगिल विजय दिवस मना रहा है. 22 जुलाई साल 1999 को हमारे सैनिकों ने कारगिल में पाकिस्तान की सेना को धूल चटाते हुए जीत का परचम लहराया था. इस युद्ध में हमारे सैनिकों ने पाकिस्तान के अपने से ज्यादा ऊंचाई पर बैठे सेना के जवानों को सीधी लड़ाई में हरा दिया. इस युद्ध में भारत की मदद के लिए एक देश आगे आया, जिसकी मदद से हमारे सैनिकों को जीत में मदद मिली.
इजरायल ने की थी कारगिल युद्ध में भारत की मददकारगिल जंग के दौरान भारत को हथियारों की भी जरुरत थी, जिसके लिए इजरायल आगे आया था. इस युद्ध के 22 साल बाद साल 2021 में खुद इजरायली दूतावास ने ट्वीट कर बताया था कि किस तरह कारगिल युद्ध में उसने भारत की मदद की थी. भारत में स्थित इजरायली दूतावास ने ट्वीट कर ये बताया था कि जंग के दौरान इजरायल ने भारत को मोर्टार और गोला-बारूद देकर सहायता की थी. इजरायल ने कहा था कि वो उन चुनिंदा देशों में से एक था जिसने कारगिल युद्ध के दौरान भारत की प्रत्यक्ष रूप से मदद की थी.
इस युद्ध के दौरान इजरायल ने भारतीय वायु सेना के मिराज 2000 लड़ाकू विमानों के लिए लेजर गाइडेड मिसाइलें दी थीं. अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबावों के बावजूद इजरायल ने कारगिल में घुसपैठ के पहले ऑर्डर दिए गए हथियारों की शिपमेंट के जरिये जल्द से जल्द भारत को सौंपा था. इसमें इजरायल के हेरोन अनमैंड एरियल वीकल (यूएवी) की डिलीवरी भी शामिल थी.भारत के लिए खुलकर सामने आया था इजरायलकारगिल युद्ध के दौरान भारत की सेना को कुछ ऐसी चीजों की जरुरत थी जो हमारे पास नहीं थीं. हमारी सेना के पास उस समय दुश्मनों के बंकरों पर सटिक निशाना लगाने वाले बम भी नहीं थे और न ही उनके पोस्ट की जासूसी करने वाले टोही विमान.
उस समय भारत ग्राउंड इंटेलिजेंस के भरोसे ही पाकिस्तान से युद्ध लड़ रहा था.इस बीच इजरायल ने भारत को तुरंत हथियार और गोला-बारूद के जरिए मदद करने का ऐलान कर दिया. दोनों देशों के बीच आनन-फानन में नए हथियारों की खरीद का समझौता किया गया. इस समझौते के तहत इजरायल ने उस समय सबसे उन्नत तकनीकी से लैस अपने हेरोन ड्रोन को भारत को सौंपा था. इतना ही नहीं, इस ड्रोन को ऑपरेट करने के लिए इजरायल ने भारतीय कर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया था.
