नई दिल्ली:– मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस वर्ष भी राज्य में दिव्यांगों को रोजगार और स्वरोजगार के लिए ई-रिक्शा वितरित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने सोमवार को निर्देश दिया कि सभी नगर निगम दिव्यांग भाइयों को एक ही छत के नीचे प्रशिक्षण, परामर्श, चिकित्सा सहायता जैसी सभी सुविधाएं प्रदान करने वाले पुनर्वास केंद्र शुरू करें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ऋण की राशि बढ़ाकर 15 लाख रुपए की जानी चाहिए।
दिव्यांग कल्याण निगम की एक बैठक सह्याद्री अतिथि गृह में आयोजित की गई थी। बैठक में मुख्यमंत्री के अलावा उद्योग मंत्री उदय सामंत, मुख्य सचिव सुजाता सौनिक, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव विकास खड़गे, दिव्यांग कल्याण विभाग के सचिव सुमंत भांगे, निगम के प्रबंध निदेशक अभय करगुटकर आदि उपस्थित थे।
दिव्यांग निगम की शेयर पूंजी 500 करोड़ रुपए है वहीं दिव्यांगों के लिए ऋण देने की सीमा 50 हजार रुपए है। बैठक में मुख्यमंत्री ने ऋण सीमा को 50 हजार से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपए करने का प्रस्ताव दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि रोजगार स्वरोजगार के लिए कौशल प्रशिक्षण देने की योजना कौशल विकास विभाग के सहयोग से बनाई जाए, ताकि विकलांगों को रोजगार के अवसर मिल सकें।
दिव्यांगों के लिए बने पुनर्वास केंद्र
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दिव्यांगों को एक ही छत के नीचे आवास, प्रशिक्षण, परामर्श, चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के लिए प्रत्येक नगर निगम को निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विभाग और निगम को यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि केंद्र सरकार की योजनाओं का राज्य में दिव्यांगों को अधिक से अधिक लाभ मिले। ऋण वितरण प्रक्रिया को फास्ट ट्रैक पर लाया जाना चाहिए, इसके लिए मोबाइल ऐप, हेल्पलाइन जैसी तकनीक की मदद ली जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने दिव्यांगों के लिए उच्च शिक्षा ऋण योजना के बारे में जागरूकता पैदा करने के निर्देश दिए।
667 रिक्शा खरीदने की स्वीकृति
दिव्यांग कल्याण विभाग के सचिव सुमंत भांगे ने बताया कि पिछले वर्ष निगम द्वारा स्वरोजगार के लिए 797 बैटरी चालित रिक्शा स्वीकृत किए गए थे। इनमें से 600 रिक्शा आवंटित किए जा चुके हैं तथा इस वर्ष भी 667 रिक्शा खरीदने की स्वीकृति 29 जुलाई को आयोजित बैठक में दी गई।
