दशहरे के दिन पान खाने की मान्यता सदियों से चली आ रही है. इसके सिर्फ धार्मिक कारण ही नहीं बल्कि कई वैज्ञानिक कारण भी हैं.
विजयादशमी के दिन कुछ ऐसी परंपराएं भी निभाई जाती हैं, जिनसे जीवन में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है. इन्हीं में से एक है पान खाना दशहरे के दिन पान खाना. आज के दिन पान खाने के कुछ वैज्ञानिक तो कुछ धार्मिक महत्व भी हैं. आइए जानते हैं कि आखिर दशहरे के दिन पान खाने को शुभ क्यों माना जाता है.

दशहरे पर क्यों खाते हैं पान, जानें ये 5 कारण
- पान को प्रेम और जीत का प्रतीक माना गया है. साथ ही बीड़ा शब्द का भी अपना विशेष महत्व है, जिसे कर्तव्य के रूप में बुराई पर अच्छाई की जीत से जोड़कर देखा जाता है. यही कारण है कि दशहरे पर रावण दहन के बाद पान का बीड़ा खाया जाता है.
- दशहरे पर पान खाने का एक कारण यह भी है कि साल के इस समय मौसम में बदलाव होता है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में पान खाना सेहत के लिए अच्छा होता है, ये सभी तरह की संक्रामक बीमारियों से आपकी रक्षा करता है.
- नवरात्रि में कई लोग 9 दिन का उपवास करते हैं. इससे जाहिर तौर पर पाचन क्रिया प्रभावित होती है. ऐसे में पान खाने से भोजन पचाने में आसानी होती है.
- दशहरे के दिन पान खाकर लोग असत्य पर हुई सत्य की जीत की खुशी मनाते हैं, लेकिन इस बीड़े को रावण दहन से पूर्व हनुमान जी को चढ़ाया जाता है.
- दशहरे के दिन पान खाने की परंपरा को लेकर वैज्ञानिकों का मानना है कि जिस तरह चैत्र नवरात्र में पूरे नौ दिन तक मिश्री, नीम की पत्ती और काली मिर्च खाने की परंपरा है, क्योंकि इनके सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता (Imunity) बढ़ती है.
