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    Home » दुनिया के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक यहूदी धर्म कैसे बना, जाने क्या है कनेक्शन इस्लाम और ईसाई धर्म से…
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    दुनिया के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक यहूदी धर्म कैसे बना, जाने क्या है कनेक्शन इस्लाम और ईसाई धर्म से…

    By Tv 36 HindustanOctober 5, 2024No Comments5 Mins Read
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    -: यहूदी देश इजराइल कई देशों से लड़ रहा है. यहूदी धर्म की जड़ें इस्लाम और ईसाई धर्म से गहराई तक जुड़ी हैं. आइए इसी बहाने जान लेते हैं, यहूदी धर्म दुनिया में कैसे आया? इसे मानने वाले किसे अपना भगवान मानते हैं? इनकी आराधना का क्या तरीका और पारसी और यहूदी में क्या अंतर है?कैसे बना यहूदी धर्म, क्या है इस्लाम और ईसाई से कनेक्शन? भगवान से आराधना तक जानें सबकुछयहूदियों का मानना है कि मसीहा अब तक दुनिया में नहीं आए हैं पर एक दिन जरूर आएंगे.

    दुनिया का एकमात्र यहूदी देश इजराइल वर्तमान में कई मोर्चों पर लड़ रहा है. ईरान, लेबनान, यमन और गाजा पट्टी के विद्रोहियों का एक साथ सामना कर रहा इजराइल जिस धर्म का उपासक है, उसकी जड़ें इस्लाम और ईसाई धर्म से गहराई तक जुड़ी हैं. ऐसा माना जाता है कि यहूदी धर्म की उत्पत्ति अब्राहमिक विश्वास के जरिए हुई. यह दुनिया के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है.

    आइए जान लेते हैं कि यहूदी धर्म दुनिया में कैसे आया? इसे मानने वाले किसे भगवान मानते हैं? इनकी आराधना का क्या तरीका? पारसी और यहूदी में क्या अंतर है.दुनिया के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक यहूदी धर्म का इतिहास 4000 साल पुराना है. ऐसी मान्यता है कि इस्लाम और ईसाई धर्म के विश्वासों को मिलाकर अब्राहमिक विश्वास की उत्पत्ति हुई. इसमें मान्यता है कि ईश्वर की उत्पत्ति अब्राहम, आइजाक, जैकब, मूसा, सोलोमन आदि जैसे प्राचीन पैगंबरों के जरिए अपना अस्तित्व दुनिया के सामने रखा.ऐसे हुआ यहूदी धर्म का विकासयहूदियों की धार्मिक पुस्तक तोराह में यहूदी धर्म के विकास के बारे में विस्तार से बताया गया है. इसके अनुसार भगवान ने सबसे पहले अब्राहम नामक एक हिब्रू को दर्शन दिया, जिन्हें यहूदी धर्म के संस्थापक के रूप में जाना जाता है. मान्यता है कि परमेश्वर ने अब्राहम के साथ एक विशेष समझौता किया था, जिसे ईश्वर और इंसान के बीच का समझौता माना जाता है. इसमें कहा गया था कि अब्राहम और उनके चुने हुए वंशज एक महान देश का निर्माण करेंगे.

    इसीलिए अब्राहम के बेटे आइजाक और उनके पोते जैकब भी प्राचीन यहूदी इतिहास में पैगंबर माने जाते हैं.ये भी पढ़ेंअंग्रेज, नवाब और वो जंग… बंगाल कैसे बना दुर्गा पूजा का गढ़?अंग्रेज, नवाब और वो जंग… बंगाल कैसे बना दुर्गा पूजा का गढ़?”इजरायल को हम देश नहीं मानते”, ऐसा कहने वाले मुल्क कितने और कौन है?”इजरायल को हम देश नहीं मानते”, ऐसा कहने वाले मुल्क कितने और कौन है?ईरान को जवाब देने में अलादीन का चिराग साबित होगा इजराइल का यह हथियारईरान को जवाब देने में अलादीन का चिराग साबित होगा इजराइल का यह हथियारजैकब ने ही अपना नाम इजराइल रखा था और उनके बच्चे और उनके बाद की पीढ़ियां इजराइली कही जाने लगीं. एक हजार से अधिक सालों के बाद मूसा ने सैकड़ों सालों तक गुलाम रहने के बाद इजराइलियों को मिस्र से निकाला.

    कौन है यहूदियों का मसीहायहूदियों की मान्यता है कि केवल एक ईश्वर है, जिसने उनके साथ एक खास समझौता किया है. उनका ईश्वर पैगंबरों के जरिए संचार स्थापित करता है और अच्छे कार्यों के लिए इनाम देता है, जबकि गलत के लिए दंडित भी करता है. कुछ समूहों को छोड़कर ज्यादातर यहूदियों का मानना है कि मसीहा अब तक दुनिया में नहीं आए हैं पर एक दिन जरूर आएंगे. यहूदी धर्मग्रंथों के अनुसार परमेश्वर ने इजराइलियों को मिस्र से निकालने वाले मूसा को माउंट सिनाई पर अपने नियम बताए थे. उन्हीं को 10 आज्ञाएं कहा जाता है.Judaismफोटो: GettyImagesतनख है यहूदियों का पवित्र धार्मिक ग्रंथयहूदियों के पवित्र ग्रंथ को तनख या हिब्रू बाइबिल कहा जाता है. इसमें ईसाइयों के बाइबिल की तरह पुराने नियमों जैसी पुस्तकें शामिल हैं. हालांकि, इन्हें थोड़े अलग-अलग क्रम में रखा गया है. तनख की पहली पांच पुस्तकें तोराह (टोरा) कही जाती हैं, जो यहूदियों के लिए पालन करने वाले कानूनों के बारे में बताती हैं. बाद में कई और महत्वपूर्ण पांडुलिपियां तैयार की गईं, जिनसे पता चलता है कि तनख की व्याख्या कैसे की जानी चाहिए.यह भी पता चलता है कि मौखिक कानूनों को कैसे दर्ज किया जाना चाहिए. 200 ईस्वी के आसपास विद्वानों ने मिशनाह नामक एक ऐसा ग्रंथ संकलित किया जो यहूदी ऐसे कानून संहिता का वर्णन और व्याख्या करता है, जो पहले मौखिक रूप से अस्तित्व में थे.Judaism Prayerयहूदी लोग आराधनालय (synagogues) के नाम से जाने जाने वाले पवित्र स्थल पर पूजा करते हैं.

    यह है पवित्र पूजा स्थलयहूदी लोग आराधनालय (synagogues) के नाम से जाने जाने वाले पवित्र स्थल पर पूजा करते हैं. इन्हें यहूदियों का चर्च या मंदिर कहा जा सकता है. इनके आध्यात्मिक नेताओं को रब्बी (rabbis) कहा जाता है. यहूदियों पर लगभग 1000 ईसा पूर्व राजा डेविड शासन करते थे. उन्हीं के थे बेटे सोलोमन, जिन्होंने येरुशलम में यहूदियों का पहला पवित्र पूजा स्थल बनवाया, जो आज यहूदियों का मुख्य पूजा स्थल है. डेविड का छह बिंदु वाला तारा यहूदी धर्म का प्रतीक माना जाता है. दुनिया भर में आज लगभग 14 मिलियन यहूदी हैं, जिनमें से ज़्यादातर अमेरिका और इजराइल में निवास करते हैं. अगर किसी व्यक्ति की मां यहूदी है तो उसे यहूदी माना जाता है.ऐसे करते हैं पूजायहूदी रोज तीन बार औपचारिक रूप से पूजा करते हैं. सुबह, दोपहर और शाम की पूजा को अलग-अलग नामों से जाना जाता है. इनकी दैनिक प्रार्थनाओं को एक पुस्तक में संकलित किया गया है, जिसे सिद्दुर कहा जाता है. यह शब्द हिब्रू मूल से निकला है जिसका मतलब है क्रम. सिद्दुर में प्रार्थनाओं के क्रम को ही दर्शाया गया है.

    यहूदी और पारसी धर्म में अंतरइजराइल के यहूदियों और पारसी धर्म में सबसे बड़ा अंतर यह है कि यहूदी पुनर्जन्म में विश्वास नहीं करते हैं, जबकि पारसी पुनर्जन्म को मानते हैं. पारसी आत्मा को शरीर से अलग इकाई मानते हैं, जबकि यहूदी धर्म में आत्मा को शरीर का अभिन्न हिस्सा माना जाता है. पारसी धर्म में अहुरमज्दा और अहरीमन के बीच सिद्धांतों का विरोध मिलता है जबकि यहूदियों की एक ही ईश्वर में मान्यता है. पारसियों का धार्मिक ग्रंथ जेन्दावेस्ता है जबकि यहूदियों की धार्मिक स्रोत तोराह है. पारसी हुरामज्दा को सर्वोपरि मानते हैं, जबकि यहूदी यहोवाह (जेहोवा) को सर्वोच्च मानते हैं.

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