हैदराबादः- धार्मिक मान्यता, सीमित क्षेत्र में खेती, कम उत्पादन और ज्यादा डिमांड के कारण बोधिचित्त का पेड़ और इसका फल बेशकीमती है. इसके एक-एक पौधे के लिए लिए 90-90 लाख तक बोली दुनिया भर के व्यापारी लगाते हैं. इसके फल से मुख्य रूप से माला तैयार होता है, जिसे बौद्ध धर्म में काफी पवित्र माना गया है. कई बार बोधिचित्त की माला सोने से भी ज्यादा कीमती देता है. इस कारण से बेशकीमती पौधे को नेपाल में सोने का पौधा भी कहा जाता है.
द राइजिंग नेपाल पोर्टल की खबर के अनुसार कावरेपालन चौक में एक बोधिचित्त पेड़ 90 लाख रुपए में बिका है. मोती कारोबारी समीप त्रिपाठी ने कावरेपालन चौक जिले के रोशी ग्रामीण नगर पालिका-5 के सिसखानी में स्थित शेर बहादुर तमांग और उनके परिवार के स्वामित्व वाले बोधिचित्त वृक्ष को खरीदने के लिए सहमति व्यक्त की है. उन्होंने तमांग परिवार को पहले पांच लाख रुपए अग्रिम दे दिया थ
इसकी मांग और कीमती माला, कंगन और अन्य उत्पादों के निर्माण के लिए काफी ज्यादा है. बोधिचित्त का मुख्य बाजार चीन है, चीन के माध्यम से इसका व्यापार दुनिया के अन्य देशों में होता है. बिचौलियों की भागीदारी के कारण किसानों को वास्तविक कीमत नहीं मिल पाती है. किसानों से बाजार में पहुंचने पर कीमत 10 फीसदी बढ़ जाती है.
बौद्ध धर्म के अनुसार बोधिचित्त एक पवित्र वृक्ष है. बोधि की माला को माला बनाने के लिए पिरोया जाता है जिसका उपयोग मंत्रों की गिनती करने के लिए किया जाता है. संस्कृत भाषा में बोधि का अर्थ है ज्ञान और चित्त का अर्थ है आत्मा. बोधिचित्त का शाब्दिक अर्थ है ज्ञान की आत्मा. बोधि बीज माला बोधि वृक्ष के नीचे बुद्ध के ज्ञान की प्राप्ति का प्रतीक है.
बौद्धों द्वारा विशेष रूप से पूजनीय होने के बावजूद, अबोधि बीज माला को सभी अभ्यासों के लिए उपयोग करने के लिए शुभ माना जाता है और यह आध्यात्मिक वादा, समर्पण और विश्वास का प्रतिनिधित्व करता है.
बोधि बीज माला बोधि वृक्ष के नीचे बुद्ध के ज्ञान की प्राप्ति का प्रतीक है. बौद्धों द्वारा विशेष रूप से पूजनीय होने के बावजूद, अबोधि बीज माला को सभी अभ्यासों के लिए उपयोग करने के लिए शुभ माना जाता है और यह आध्यात्मिक वादा, समर्पण और विश्वास का प्रतिनिधित्व करता है.
पेड़ का नाम दो संस्कृत शब्दों से आया है, “बोधि”, जिसका अर्थ है “ज्ञान देना” और “चित्त”, जिसका अर्थ है “आत्मा”. नेपाली स्वदेशी तमांग समुदाय इसे फ्रेंगबा कहते हैं लेकिन तिब्बत में इसे तेनवा और चीन में इसे शू झू कहा जाता है. एक प्रार्थना माला में 108 सामान्य मोती और एक मास्टर या गुरु मोती होता है. मास्टर मोती को छोड़कर सभी मोती एक ही आकार के होने चाहिए. चीनी व्यापारियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण द्वारा मोतियों को मिलीमीटर में मापा जाता है.
पेड़ का नाम दो संस्कृत शब्दों से आया है, “बोधि”, जिसका अर्थ है “ज्ञान देना” और “चित्त”, जिसका अर्थ है “आत्मा”. नेपाली स्वदेशी तमांग समुदाय इसे फ्रेंगबा कहते हैं लेकिन तिब्बत में इसे तेनवा और चीन में इसे शू झू कहा जाता है. एक प्रार्थना माला में 108 सामान्य मोती और एक मास्टर या गुरु मोती होता है. मास्टर मोती को छोड़कर सभी मोती एक ही आकार के होने चाहिए. चीनी व्यापारियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण द्वारा मोतियों को मिलीमीटर में मापा जाता है.
