कई संस्कृतियों में गर्भवती महिला को लेकर कहावत बेहद मशहूर है. वह यह है कि गर्भवती महिला को बदसूरत जानवर नहीं देखने चाहिए. एबीपी लाइव के मिथ और फैक्टस सीरीज में जानें क्या है पूरा सच.
कई संस्कृतियों में गर्भवती महिला को लेकर कहावत बेहद मशहूर है. वह यह है कि गर्भवती महिला को बदसूरत जानवर नहीं देखने चाहिए. क्योंकि इस असर बच्चे पर होता है. और बच्चा भी बदसूरत होता है. हम किसी विचारधारा के न खिलाफ और न ही सपोर्ट में है. लेकिन इससे जुड़े फैक्ट्स हम आपके सामने पेश करने की कोशिश करेंगे. प्रेग्नेंसी को लेकर समाज में जितने भी मिथ है. जिसे लोग सच समझकर फॉलो करते हैं हम उनका लॉजिकल तरीके से जवाब देने की कोशिश करेंगे.
अगर आप किसी व्यक्ति के बारे में नकारात्मक बात करते हैं, तो बच्चा उस व्यक्ति जैसा ही होगा. इस पर थोड़ा अलग दृष्टिकोण यह है कि माताओं को अप्रिय या बदसूरत जानवरों को देखने से बचना चाहिए. अन्यथा उनका बच्चा बदसूरत पैदा होगा. यह बिल्कुल भी सच ॉनहीं हो सकता. हम सभी जानते हैं कि बच्चे बदसूरत नहीं होते. बच्चे की खूबसूरती या बदसूरती पूरी तरह से पूरी तरह से माता-पिता के जीन पर निर्भर करता है. इसमें जानवर को देखने से ऐसा होगा ये होगा. इसके पीछे कोई लॉजिक नहीं है.
प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले बदलाव को पालतू जानवर पहचान लेते हैंआपके पालतू जानवर शायद यह नहीं समझते कि नौ महीने में आपके परिवार में एक नया बच्चा शामिल होने वाला है, लेकिन कुत्ते और बिल्लियां आपके मूड, आसन, व्यवहार और शरीर के रसायन में अंतर को पहचान लेते हैं, जिससे उन्हें आपके अंदर होने वाले बड़े बदलावों का पता चल जाता है.
प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती महिला आराम से जू जा सकती हैं. सिर्फ इतना ही नहीं वह आराम से जानवरों को देख सकती है. ऐसा कुछ नहीं होता है कि जानवर का असर बच्चा पर होगा. बच्चा कितना सुंदर होगा यह पूरी तरह से माता-पिता के जिन पर निर्भर करता है.
