नई दिल्ली :– दिसंबर के महीने में उल्का वर्षा भी देखने को मिलेगी। 13 दिसंबर की रात जेमिनिड उल्का वर्षा आसमान को रोशन करेगी। आसमानी नजारे के दीवानों को यह अद्भुत दृश्य पेश करेगा। हालांकि पूर्णिमा भी करीब है, ऐसे में चांदनी उल्का की दृश्यता को कम कर सकती हैं। फिर भी यह घटना अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए खास है। जेमिनिड शो का आनंद लेने के लिए आपको किसी अंधेरी और शांत इलाके का चयन करना चाहिए।
आप शहर की रोशनी से दूर रहें और अपनी आंखों को अंधेरे के अनुकूल होने दें। ठंडी रातों के लिए गर्म कपड़े पहनना भी जरूरी है। आसमान को देखने के लिए पीठ के बल लेटें, ताकि विस्तृत नजारा मिल सके। उल्काएं आधी रात के बाद सबसे ज्यादा दिखाई देती हैं। रात में लगभग 2 बजे के करीब यह चरम पर होती हैं। चांद की रोशनी अगर किसी वस्तु या बिल्डिंग से ढकी हो तो इसे देखने की संभावना बेहतर हो सकती है। इसके अलावा उल्का वर्षा देखने के लिए आपको धैर्य भी रखना होगा।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
नासा एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस साल बढ़ते चंद्रमा की चमक के कारण दृश्यता प्रभावित होगी। तेज चांदनी के कारण हल्के उल्काओं को देखना मुश्किल होगा। नासा विशेषज्ञ बिल कुक के अनुसार 2025 में स्थिति बेहतर होगी। खगोल प्रेमी अगले साल साफ आकाश और कम बाधाओं के साथ बेहतर दृश्यता का आनंद ले सकते हैं।
क्यों खास है यह उल्का वर्षा?
ज्यादातर उल्का वर्षा धूमकेतुओं से पैदा होती हैं। लेकिन जेमिनिड्स क्षुद्रग्रह के मलबे से आते हैं। एस्टेरॉयड 3200 फेथॉन अपनी अनूठी कक्षा के दौरान चट्टानी टुकड़े गिराता है। जब ये पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं तो वे चमकदार जेमिनिड डिस्प्ले बनाते हैं। अगर स्थिति अच्छी हो तो जेमिनिड्स प्रति घंटे 120 उल्काएं उत्पन्न कर सकते हैं। अपनी गति और चमक के लिए इन उल्कापिंड को जाना जाता है जो अक्सर पीले रंग की चमक बिखेरते हैं। ये 35 किमी प्रति सेकंड की गति से यात्रा करते हैं।
