रायपुर :- सीएम साय ने बताया कि बस्तर की हस्तकला और संस्कृति को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। सागवान की लकड़ी से बनी आकृतियाँ, बेल मेटल की मूर्तियाँ और गोंडागाँव की कारीगरी को विदेशी एग्जीबिशन में प्रदर्शित किया जा रहा है। ‘बस्तर पांडुम’ जैसे उत्सवों में पारंपरिक वेशभूषा, व्यंजन, 200 प्रकार के लकड़ी के वाद्ययंत्र और सलखी रस जैसे स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ सदन में भी लोकल व्यंजन परोसे जा रहे हैं और ‘गढ़ कलेवा’ जैसे स्टॉल जगह-जगह खुले हैं।
उन्होंने अंत में छत्तीसगढ़ की भोजन संस्कृति की चर्चा की। वारसी को ‘धान का कटोरा’ बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां सुबह, शाम और रात – हर वक्त चावल खाया जाता है। रात में चावल और पानी खाकर उसे सुबह तक खट्टा कर लिया जाता है, जिसमें नींबू, मिर्ची और प्याज साथ लिया जाता है जिससे गर्मी नहीं लगती। इसपर पत्रकारों ने उन्हें जानकारी दी कि इसे आजकल फिटनेस ट्रेनर डायट प्लान में भी शामिल कर रहे हैं और ये ख़ासा लोकप्रिय होता जा रहा है।
