बिहार :– विधानसभा चुनाव में एनडीए की दमदार जीत के बाद गुरुवार को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जबकि उनके साथ कुल 26 मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे।
दो डिप्टी सीएम के साथ नई टीम:
एनडीए सरकार की नई कैबिनेट में बीजेपी कोटे से सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। कुल मंत्रियों में बीजेपी के 14, जेडीयू के 8, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 2, जबकि हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा से एक-एक नेता को शामिल किया गया है।
इन प्रमुख नेताओं ने ली मंत्री पद की शपथ:
नई कैबिनेट में कई नए और पुराने चेहरे नजर आए। इनमें मंगल पाण्डेय, अशोक चौधरी, लेशी सिंह, श्रेयसी सिंह, रमा निषाद और मदन सहनी के नाम शामिल हैं। वहीं HAM से जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन और RLSP से उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश ने मंत्री पद संभाला है।
कैबिनेट में जातिगत समीकरण का विशेष ध्यान:
नीतीश कैबिनेट में इस बार जातिगत संतुलन पर खास फोकस किया गया है। जिसमें दलित वर्ग के सबसे अधिक 5 मंत्रियों में सुनील कुमार, अशोक चौधरी, लखविंदर रोशन, संजय पासवान, संतोष सुमन शामिल हैं. वैश्य समाज के कुल 4 मंत्री दिलीप जायसवाल, नारायण प्रसाद, प्रमोद कुमार, अरुण शंकर प्रसाद, राजपूत समुदाय के मंत्री बनाए गए हैं, और श्रेयसी सिंह, संजय सिंह टाइगर लेसी सिंह भी शामिल हैं, अन्य प्रमुख वर्ग मकोइरी: सम्राट चौधरी, सुरेंद्र मेहता, दीपक प्रकाश, कुर्मी: श्रवण कुमार, भूमिहार: विजय चौधरी, विजय सिन्हा, निषाद: मदन सहनी, रमा निषाद, यादव: राम कृपाल यादव, बिजेंद्र यादव, ब्राह्मण: मंगल पांडेय, कायस्थ: नितिन नवीन, मुस्लिम समुदाय: जमा खान एक मुस्लिम चेहरे को भी मौका मिला है. नई एनडीए सरकार में मुस्लिम समाज से केवल जमा खान को जगह दी गई है, जो अल्पसंख्यक वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं।
बिहार की राजनीति में नई शुरुआत:
नीतीश कुमार और एनडीए गठबंधन की यह सरकार जातिगत संतुलन, संगठनात्मक मजबूती और सामाजिक विविधता का प्रतिनिधित्व करती है। 10वीं बार मुख्यमंत्री पद संभालते हुए नीतीश कुमार ने संकेत दिया कि उनका अनुभव और राजनीतिक स्थिरता बिहार के विकास के लिए निर्णायक होगी।
