छत्तीसगढ़:– बस्तर संभाग में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कार्य कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों की लंबित CRMC (नक्सल क्षेत्र प्रोत्साहन राशि) ने अब बड़ा रूप ले लिया है। नारायणपुर में शुरू हुआ विरोध आज पूरे बस्तर—नारायणपुर, कोंडागांव, बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और जगदलपुर—तक फैल गया। डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों ने ब्लैक रिबन पहनकर विरोध दर्ज कराया और प्रशासन को चेतावनी दे दी कि अब धैर्य की सीमा पार हो चुकी है।
जोखिम भरे इलाकों में सेवाएँ, पर 11 महीने से रुका भुगतान
नक्सलियों की मौजूदगी वाले कठिन इलाकों में दिन-रात सेवा दे रहे इन स्वास्थ्यकर्मियों को लंबे समय से प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है। डॉक्टरों का 2.5 से 3 लाख रुपये तक भुगतान लंबित, नर्सों का 30 से 40 हजार रुपये तक बकाया, वहीं संभागभर में लंबित राशि कई करोड़ के पार पहुँच चुकी है।
मंत्रियों से कई दौर की मीटिंग, पर फैसला अभी तक नहीं
इस मुद्दे पर कई हाई-लेवल चर्चाएँ हो चुकी हैं। बैठकों में शामिल रहे— कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, DHS कमिश्नर, MD-NHM डॉ. प्रियंका जे. शुक्ला नारायणपुर के डॉक्टरों ने केदार कश्यप से स्थिति बताई थी। उन्होंने तत्काल स्वास्थ्य मंत्री और सचिव से चर्चा भी की, लेकिन फैसले के स्तर पर कोई ठोस कदम आज तक नहीं उठाया गया।
काला रिबन लगा विरोध, पर सेवाएँ सामान्य
25 नवंबर को सभी जिलों में स्वास्थ्यकर्मियों ने OPD और Emergency सेवाएँ जारी रखते हुए शांतिपूर्ण विरोध किया। वे कहते हैं कि यह लड़ाई जनता से नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ है। कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है—इतने संवेदनशील क्षेत्र में काम करने वालों को महीनों तक बकाया में रखना न केवल गलत है, बल्कि उनके मनोबल पर गहरा प्रभाव डालता है।
1 दिसम्बर से बड़े आंदोलन की तैयारी
नारायणपुर जिला पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि यदि 30 नवंबर तक भुगतान नहीं हुआ, तो 1 दिसम्बर से संभाग स्तर पर OPD सेवाओं को बंद कर दिया जाएगा। आज पूरे बस्तर में एक साथ हुआ विरोध इस बात का संकेत है कि आंदोलन अब व्यापक और संयुक्त रूप ले चुका है।
