नई दिल्ली:– वैदिक ज्योतिष में रत्नों का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि सही रत्न न केवल ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा को शांत करते हैं, बल्कि जीवन में सौभाग्य, धन-संपदा और तरक्की के रास्ते भी खोल देते हैं। इनमें से एक ऐसा रत्न है पुखराज, जिसे बृहस्पति ग्रह का प्रतिनिधि माना गया है। ज्योतिषियों के अनुसार, इसे पहनने से जीवन में स्थिरता, आर्थिक वृद्धि और सम्मान में बढ़ोतरी देखी जा सकती है। पुखराज धारण करने वाले व्यक्ति के व्यक्तित्व में आत्मविश्वास बढ़ता है और भाग्य मजबूत होता है।
क्यों माना जाता है पुखराज इतना शुभ?- पुखराज को ‘ज्ञान, समृद्धि और सौभाग्य’ का रत्न कहा गया है। यह जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है और आर्थिक तरक्की में बाधा बन रहे ग्रहों को शांत करता है। कहा जाता है कि पुखराज पहनने से व्यक्ति के जीवन में अचानक धन के नए अवसर खुलते हैं, बिजनेस में ग्रोथ होती है और भविष्य से जुड़ी दिक्कतें कम होती हैं।
पुखराज से मिलने वाले प्रमुख लाभ
धन-संपदा में वृद्धि।
व्यापार, नौकरी और निवेश के मामलों में भाग्य का साथ मिलने लगता है।
मान-सम्मान में बढ़ोतरी।
सामाजिक और पेशेवर जीवन में सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ती है।
वैवाहिक जीवन में मजबूती।
ग्रहों की अनुकूलता के कारण रिश्तों में स्थिरता आती है।
शिक्षा और करियर में सफलता।
छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों को विशेष लाभ मिलता है।
स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर।
मानसिक शांति बढ़ती है और तनाव भी कम होता है।
किसे पहनना चाहिए यह रत्न?-
जिनकी कुंडली में बृहस्पति कमजोर हो।
धन, करियर, शिक्षा में बार-बार रुकावटें आ रही हों।
कन्या, धनु, मीन और कर्क लग्न वालों को अक्सर शुभ फल मिलते हैं।
शिक्षक, लेखक, वैज्ञानिक, चार्टर्ड अकाउंटेंट, सलाहकार और आध्यात्मिक क्षेत्र वाले लोग इसे पहनकर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
कैसे और कब पहनें पुखराज?
गुरुवार के दिन, सुबह के समय सोने की अंगूठी में धारण करें।
कम से कम 5 से 7 रत्ती का होना चाहिए।
इसे पहनने से पहले गाय के दूध और गंगाजल से शुद्ध कर ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः’ मंत्र का जाप करें।
